जांजगीर चंपा

नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें प्रदान करने के लिए बनाए गए ये कड़े नियम…

- फिलहाल निजी स्कूलों को नि:शुल्क पुस्तक वितरण शुरू कर दिया गया है।

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नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें प्रदान करने के लिए बनाए गए ये कड़े नियम...

जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम ने जिले के सभी सरकारी स्कूलों तक नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें तो पहुंचा दी, लेकिन निजी स्कूल संचालकों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें देने के लिए इस साल कड़े नियम बना दी है। निजी स्कूल संचालकों को वेब साइट में अपने स्कूलों में छात्रों की दर्ज संख्या के हिसाब से ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।

इसके बाद यही आवेदन को डीईओ से काउंटर साइन कराना होगा। इसके बाद डीईओ के अनुमति के बाद संबंधित स्कूलों को पाठ्य पुस्तकें की नि:शुल्क किताबें मिल पाएगी। फिलहाल निजी स्कूलों को नि:शुल्क पुस्तक वितरण शुरू कर दिया गया है। हाईस्कूल नंबर वन से निजी स्कूल संचालक किताबें ले जाना शुरू कर दिए हैं।

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सरकार नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण में सरकारी और निजी स्कूलों में किस तरह भेद भाव करती है इसका जीता जागता उदाहरण इस साल देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम ने सरकारी स्कूलों में समय से पहले नि:शुल्क किताबें पहुंचा चुकी है। वहीं निजी स्कूलों में किताबें वितरण के लिए नए नियम बना दिए हैं।

हालांकि निजी स्कूलों को पर्याप्त समय दिया गया है, लेकिन नए नियम बना दिए गए हैं। निजी स्कूलों को पहले संबंधित विभाग के वेबाइट में आनलाइन छात्रों की दर्ज संख्या देना होगा। इसके बाद उन्हें डीईओ से उक्त आवेदन को सर्टिफाई कराया जाएगा। इन सब औपचारिकता पूरी होने के बाद आपको नि:शुल्क किताबें मिल पाएगी।

हाईस्कूल नंबर एक में वितरण शुरू
जांजगीर के हाईस्कूल नंबर वन में निजी स्कूल को नि:शुल्क पुस्तक वितरण के लिए गोदाम बनाया गया है। यहां शुक्रवार से पुस्तक वितरण का कार्य शुरू हो चुका है। निजी स्कूल संचालक पुस्तक लेने पहुंच रहे हैं। पहले दिन तकरीबन एक दर्जन निजी स्कूल संचालकों ने पुस्तक ले गए। वहीं दूसरे दिन मात्र गिनती के लोग पहुंचे। क्योंकि उन्हें यह भ्रम था कि दूसरे शनिवार को छुट्टी रहती है। इसके कारण शनिवार को यहां भीड़ कम
दिखाई दी।

गोदाम भगवान भरोसे
बीते वर्ष छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के गोदामों से लाखों की किताबों की चोरी हो गई थी। दरअसल बीते वर्ष हाईस्कूल नंबर वन के पीछे भाग के खाली पड़े कमरे को गोदाम बनाया गया था। गोदाम में चौकीदार की व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते कबाड़ व्यवसायियों ने रिक्शा से किताओं को भरकर कबाड़ के पास बेच दिया था। चोरी की घटनाओं को देखते हुए इस साल इसका स्थान बदला गया है। इस साल सामने वाले हिस्से को पाठ्य पुस्तक का गोदाम बनाया गया है। इस साल चौकदार की व्यवस्था की गई है या नहीं यह भी अधर में है।

36 स्कूलों का भविष्य अधर में
जिले में ४१४ निजी स्कूल संचालित है। जिसमें ३७८ स्कूलों ने ही ऑनलाइन आवेदन जमा किया है। शेष ३६ स्कूल संचालक पाठ्य पुस्तक के लिए आवेदन जमा नहीं किया है। जिसके चलते उन स्कूलों को नि:शुल्क किताबे प्रदान करने के लिए संशय बरकरार है। बताया जा रहा है कि ये वही स्कूल है जिन्होंने शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए वेबसाइट पर अपना नामांकन ही नहीं कराया था।

-हाईस्कूल नंबर वन में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम ने निजी स्कूलों को किताबें वितरण का काम शुरू कर दिया गया है। इस साल पुस्तक वितरण नियम में बदलाव किया है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले स्कूलों को ही पुस्तकें प्रदान किया जा रहा- जीपी भास्कर, डीईओ

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Published on:
10 Jun 2018 01:26 pm
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