थोक और चिल्हर कीमत में सब्जियों के दाम में काफी अंतर है। किसानों से आधी कीमत पर सब्जी खरीद कर मनमानी रेट पर व्यापारी बेच रहे हैं।
जांजगीर-चांपा. मानसून आते ही मुनाफाखोरों की वजह से सब्जी के दाम आसमान छूने लगे हैं। फुटकर में सब्जी के दाम चार गुना तक बढ़ गए हैं। बीते सप्ताह तक केवल टमाटर का दाम बढ़ा था, लेकिन अब अन्य सब्जियां भी महंगी हो गई हैं। विशेषकर थोक और चिल्हर कीमत में सब्जियों के दाम में काफी अंतर है। किसानों से आधी कीमत पर सब्जी खरीद कर मनमानी रेट पर व्यापारी बेच रहे हैं। किसान इसलिए लुट जाता है, क्योंकि उसके पास सब्जी रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं।
इससे सबसे ज्यादा मध्यम वर्गीय और गरीब उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं। थोक में मात्र 10 रुपए किलो बिकने वाला मुनगा 40 रुपए किलो बिक रहा। इसी तरह टमाटर 35 से 40 रुपए किलो बेचा जा रहा। भिंडी 20 रुपए किलो बिक रही। धनिया और मिर्च ने भी रुलाना शुरू कर दिया है। इनके साथ ही परवल, पत्ता गोभी, बरबट्टी जैसी सब्जियां भी थोक में काफी कम में बोली लगाई जा रही थी, लेकिन चिल्हर में इनकी कीमतें दो से चार गुने तक थे।
सब्जी कारोबारियों का कहना है कि कुछ सब्जियां हालांकि कमजोर आवक के चलते प्रभावित हुई है, लेकिन सभी सब्जियां इस प्रकार से प्रभावित नहीं होती। सब्जियां उगाने वाले किसानों ने बताया कि बरबट्टी, टमाटर जैसी सब्जियां जितनी थोक में बिकती है, उसकी आधी कीमत ही उन्हें मिल पाती है। बीते सप्ताह से ही कमजोर आवक के चलते महंगी धनिया 200 रुपए किलो तक बिकी। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में तो धनिया की कीमत में और बढ़ोतरी के संकेत हैं।
धनिया के साथ ही मिर्च ने भी लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है। थोक में मिर्च 50 रुपए किलो तथा चिल्हर में 70 रुपए किलो तक बिक रही है। इस प्रकार धनिया.मिर्च की कीमतें आसमान छू रही है। कारोबारियों का कहना है कि इनकी आवक काफी कम होते जा रही है। बाहरी आवक नहीं है तथा लोकल आवक खेती किसानी के चलते प्रभावित हो गई है। इसके चलते ही कीमत में तेजी है। किसानों ने बताया कि बिचौलियों को सब्जियां इसलिए देनी पड़ती हैं, क्योंकि उन्हें उसकी थोड़ी बहुत भी कीमत तुरंत मिल जाती है। हमारे पास रखने के लिए कोई कोल्डस्टोरेज नहीं हैं, इसलिए ज्यादा दिन तक रखने पर सब्जियां खराब होने का डर रहता है।