
जांजगीर-चांपा. रविवार शाम तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने किसानों के साथ आमजन को हलाकान कर दिया। पूरे जिले में तेज हवाओं का असर रहा और लोग प्रभावित हुए। इसके के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में घंटो बिजली गुल रही। कई स्थानों पर तो मकानों के छप्पर व टीन शेड उडऩे की खबर है, तो कहीं पेड़ ही धराशाई हो गए हैं। बारिश व अंधड़ के चलते शिवरीनारायण के मेले में भी अफरा तफरी का माहौल रहा। वहीं अरबों के धान पर भी खतरा मंडराने लगा है।
बेमौसम बारिश के चलते लोगों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में रविवार शाम तेज हवाओं के बाद बिजली गुल हो गई, जो घंटो बाद बहाल हो सकी। शनिवार को दिनभर तेज धूप और गर्मी के बाद अचानक रविवार देर शाम मौसम में बदलाव हुआ। तेज हवा चलने लगी। इस कारण शहर सहित जिले भर की बिजल गुल हो गई। इसके चलते शहरवासियों को काफी परेशान होना पड़ा। देर रात तक ऐसा ही मौसम बना रहा। सूर्य देव के दर्शन रविवार सुबह से ही नहीं हुआ था।
मौसम में खराबी के साथ बिजली गुल होने के कारण लोगों को उमस के बीच समय गुजारना पड़ा। इससे बिजली कंपनी के मेंटेनेंस को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हंै कि बारिश के पहले ही तेज हवाओं में बिजली गुल करने की नौबत आ रही है। शाम तकरीबन चार बजे ही मौसम में बदलाव होने लगा। हल्की ठंडी हवाएं चलने लगी। इसके बाद आधा घंटे तक आंधी चलती रही और बारिश होने लगी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रातभर बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इसके साथ ही खेतों में लगी सब्जी के साथ गेहूं तथा अन्य फसलों का नुकसान हुआ है। हालांकि बारिश को धान के फसल के लिए लाभप्रद बताया जा रहा है, लेकिन अन्य फसलों के लिए नुकसानदेह ही रहा।
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स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव
वहीं मौसम परिवर्तन के साथ बिजली बंद होने का असर स्वास्थ पर भी देखने को मिला और तेज हवाओं के चलते लोगों को सर्दी, बुखार के साथ अन्य मौसमी बिमारियों के गिरफ्त में देखा गया। मौसम में चल रहे उठा-पटक के चलते रविवार सुबह से ही जिला चिकित्सालय सहित निजी क्लिनीकों में मरीजों की भीड़ लगी रही। इसी तरह खराब मौसम का असर भी देखने को मिला। रविवार दिनभर बादल छाए रहने के कारण तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट रही। इस दौरान न्यूनतम तापमान १४ डिग्री से कम रहा, तो वहीं अधिकरत तापमान ३० डिग्री सेल्सियस से कम रहा। मिली जानकारी के अनुसार ऊपरी सिस्टम में दबाव बढऩे के कारण मौसम में बदलाव हुआ है। इस वजह से मौसम बदल गया है और आगे कुछ दिन भी ऐसे हालात रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
बारिश से साढ़े चार अरब के धान पर संकट
रविवार की शाम आई अचानक तेज बारिश ने संग्रहण केंद्र व समिति प्रभारियों के हाथ पांव फूल गए। समिति व संग्रहण केंद्र में धान भीगने का खतरा सता रहा है, क्योंकि संग्रहण केंद्र में पर्याप्त कैंप कव्हर नहीं होने से धान अंकुरित होने का खतरा है। वर्तमान में जिले के एक दर्जन से अधिक समिति व ५ संग्रहण केंद्र में ३० लाख क्ंिवटल धान खुले में रखा हुआ है। जिसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में इस बार ३० लाख किवटल धान को संग्रहण केंद्र में रखा गया है। संग्रहण केंद्र में सुरक्षा के पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए गए हैं। जिसके चलते धान भीगने का खतरा सता रहा है। अब तक बारिश की आशंका नहीं थी। जिसके कारण संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने कैंप में धान की बोरियों को ढंकने के लिए पॉलीथिन तक की व्यवस्था नहीं थी। रविवार शाम को जब अचानक बारिश हुई तब संग्रहण केंद्र में अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई थी। संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने किसी तरह फटे पुराने कैप कव्हर से धान को ढंकने की व्यवस्था बनाई, लेकिन वह पर्याप्त नहीं दिखी, क्यों पानी लगातार दो से तीन घंटे तक बरसा। लोगों का कहना है कि धान काफी मात्रा में भीग गया होगा, क्योंकि धीमी बारिश से पानी अधिक मात्रा में अंदर घुसता है।