
Chhattisgarh News: जिस घर में 24 सितंबर को नवजात की किलकारी गूंजी, वहां महज तीन दिन बाद मातम पसर गया। सामान्य प्रसव के बाद स्वस्थ बेटे को जन्म देने वाली मां एक दिन तक अपने लाडले को गोद में खिलाया, फिर दूसरे दिन इंजेक्शन लगने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी, कोमा में चली गई और वेंटिलेटर तक पहुंच गई। 27 सितंबर की देर रात उसकी मौत हो गई। अब मां के बिना नवजात और जवाब के इंतजार में परिवार जिला अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहा है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मौत हुई है। इसको लेकर परिजनों ने हंगामा किया, साथ ही बच्चे के पालन-पोषण की मांग व लापरवाही बरतने वाले जांच कर कार्रवाई की मांग की।
जांजगीर-चांपा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बार फिर डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जहां प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई। नवजात बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है, लेकिन मां की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और ड्यूटी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ने के दौरान पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी नहीं मिली। उन्होंने रात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने तथा नर्सिंग स्टाफ के निर्धारित समय से पहले चले जाने का भी आरोप लगाया है।
चांपा थाना के गांव अफरीद निवासी सरिता गंधर्व पति आदित्य चौहान प्रसव पीड़ा होने पर 24 सितंबर को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। सरिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी दिन उसका शाम को प्रसव हुआ और नॉर्मल डिलीवरी के बाद उसने स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। बच्चा स्वस्थ है। प्रसव के बाद शुरुआत में महिला की स्थिति भी ठीक बताई जा रही थी। परिजनों का आरोप है कि 25 सितंबर को सरिता को एक इंजेक्शन लगाया गया, इसके बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह कोमा जैसी स्थिति में चली गई।
उसको आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। जहां वेंटिलेटर में रखा गया। इसके बाद उसका उपचार चलता रहा, लेकिन हालत में सुधार नहीं आया। आखिरकार 27 सितंबर की देर रात करीब 2 से 2.25 बजे के बीच उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिवार सदमे में हैं। एक ओर नवजात के स्वस्थ होने की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर मां की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। परिजनों का कहना है कि यदि प्रसव के बाद महिला की स्थिति सामान्य थी तो 25 सितंबर को ऐसा क्या हुआ कि उसकी हालत अचानक इतनी गंभीर हो गई। परिवार इंजेक्शन लगाए जाने के बाद हालत बिगड़ने की बात कहते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग कर रहा है। साथ ही जिला अस्पताल में बच्चे के पालन पोषण व संबंधित लापरवाही बरतने वाले पर कार्रवाई की मांग की गई। प्रशासन की समझाइश के बाद परिजन माने और इसका ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।
परिजनों ने जिला अस्पताल की रात्रिकालीन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रात में मौके पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। केस बिगड़ने के बाद मात्र एक स्टाफ नर्स के अलावा कोई कर्मचारी नहीं थे। कुछ देर बाद आकर एक डॉक्टर ने रेफर करने की बात कही। फिर कुछ देर बाद डेड घोषित कर दिया गया। रात 8 बजे का समय होने से पहले ही स्टाफ निकलने लगते हैं। गंभीर मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाए तो तत्काल उपचार कौन करेगा, यह बड़ा सवाल है।
फिलहाल महिला की मौत इंजेक्शन की प्रतिक्रिया, प्रसव से जुड़ी किसी चिकित्सकीय जटिलता या अन्य कारण से हुई, यह चिकित्सकीय जांच और अस्पताल के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण पता चल सकेगा।
सिविल सर्जन डॉ. बीएल जांगड़े ने कहा कि महिला की पैर में सूजन, बीपी बढ़ा व ब्लड कम था। रास्ता खुला हुआ था, इसलिए तत्काल डिलीवरी कराई गई। परिजनों को पहले ही गंभीर स्थिति होने की जानकारी व बाहर ले जाने कहा गया था। लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। मृत्यु का कारण पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।