जौनपुर की एक अदालत ने अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ सदर तहसीलदार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सड़क दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने तहसीलदार का वेतन रोकने का आदेश दिया है...
जौनपुर की एक अदालत ने अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ सदर तहसीलदार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सड़क दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने तहसीलदार का वेतन रोकने का आदेश दिया है। साथ ही इस संबंध में लखनऊ के जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह मामला एक सड़क हादसे में मृत ठेकेदार के परिजनों को मुआवजा न मिलने से जुड़ा है। अदालत ने पहले ही बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया था, लेकिन उसके बाद जारी राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) पर प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि तहसीलदार ने अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस मामले में लापरवाही बरती। इस लापरवाहीके कारण पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में देरी हुई।
घटना महाराजगंज थाना क्षेत्र के कोल्हुआ गांव निवासी हरिश्चंद्र निषाद (36) से संबंधित है। 20 अक्टूबर 2022 को एक ट्रैक्टर से हुई सड़क दुर्घटना में हरिश्चंद्र निषाद की मौत हो गई थी। हरिश्चंद्र गुजरात में लेबर कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम करते थे। बताया जा रहा है कि हरिश्चंद्र ही अपने परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी असामयिक मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है और भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है।
मृतक की पत्नी निशा और उनके बच्चों ने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में ट्रैक्टर मालिक, चालक और बीमा कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा दायर किया था। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने ट्रैक्टर चालक को लापरवाही का दोषी माना। इसके बाद 25 जुलाई 2025 को अदालत ने मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को दो महीने के भीतर 63.60 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
हालांकि, तय समय सीमा के भीतर भुगतान न होने पर अदालत ने वसूली के लिए आरसी जारी की, लेकिन इस पर भी अमल नहीं हो सका। तहसील स्तर पर कार्रवाई न होने से नाराज अदालत ने इसे आदेश की अवमानना मानते हुए कड़ा कदम उठाया। लखनऊ के जिलाधिकारी को अदालत ने निर्देश को कड़ाई से पालन करवाने का आदेश दिया है।