जौनपुर

बछड़े की मौत पर शोक: हिंदू रीति-रिवाज से किया अंतिम संस्कार, बाल मुंडवाए अब 13वीं कार्यक्रम की तैयारी

Unique story of animal love: जौनपुर से पशुवत प्रेम की एक ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिसने समाज को सोचने पर मजबूत कर दिया है कि जीवों पर दया करो और उन्हें अपनों से अलग न समझों, क्योंकि यह बेजुबान भले ही होते हैं लेकिन वफादार और समझदार होते हैं।
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Oct 19, 2026
Unique Animal Love Story Uttar Pradesh
अपने पालतू बछड़े का पूरे विधि-विधान से कराया अंतिम संस्कार (फोटो पत्रिका)

Unique Animal Love Story Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से पशुओं के प्रति अगाध प्रेम और संवेदनशीलता की एक ऐसी अनूठी और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह वाकया इंसानों और बेजुबान जानवरों के बीच के आत्मीय रिश्ते की एक ऐसी मिसाल पेश करता है, जो आधुनिक दौर में बेहद दुर्लभ होती जा रही है। समाज अक्सर इंसानों के बीच की संवेदनाओं तक सीमित रहता है, लेकिन जौनपुर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि मूक और बेजुबान जीव भी हमारे परिवार और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं।

चक गोविंदपुर गांव का पूरा मामला

यह पूरा वाकया जौनपुर जिले के केराकत तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चक गोविंदपुर गांव से जुड़ा है। यहां के निवासी और पूर्व सरपंच रामलगन यादव (पुत्र स्वर्गीय कन्हैया उर्फ कनई यादव) ने अपने पालतू बछड़े की मृत्यु के बाद जो अंतिम संस्कार का अनुष्ठान किया, उसकी चर्चा आज पूरे इलाके में हो रही है। आम तौर पर किसी मनुष्य की मृत्यु होने पर सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार उसका अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक कृत्य पूरे किए जाते हैं, लेकिन पूर्व सरपंच ने अपने पालतू बछड़े के निधन पर बिल्कुल इसी तर्ज पर तमाम धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।

समाधि और वैदिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार

बीते 15 अक्टूबर को पूर्व सरपंच के पालतू बछड़े का अचानक निधन हो गया। इस घटना से परिवार और आसपास के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद पूर्व सरपंच ने सनातन धर्म की परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए बछड़े को विधि-विधान के साथ समाधि देकर उसका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान ग्रामवासियों समेत आसपास के कई गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और बेजुबान को अपनी श्रद्धांजलि दी।

घाट क्रिया और तेरहवीं का विशेष आयोजन

अंतिम संस्कार के बाद परंपराओं का सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद 19 अक्टूबर को घाट क्रिया का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें नियमों के तहत बाल और दाढ़ी मुंडवाकर ब्राह्मण द्वारा पूरे विधि-विधान से क्रियाकर्म संपन्न कराया गया। अब इस अनुष्ठान के अगले चरण के तहत आगामी 27 अक्टूबर को बछड़े की तेरहवीं (13वीं) का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

इलाके में हो रही है सनातन परंपरा और जीव प्रेम की चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केराकत क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे जौनपुर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग पूर्व सरपंच रामलगन यादव के इस कदम की भरपूर सराहना कर रहे हैं। समाज के जानकारों का मानना है कि यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि जीवों पर दया करनी चाहिए और उन्हें केवल मवेशी न समझकर अपनों की तरह स्नेह देना चाहिए। यह अनोखा आयोजन इंसानों और जानवरों के बीच के अटूट वफादारी के रिश्ते को एक नए मुकाम पर ले गया है, जिसकी प्रशंसा हर कोई कर रहा है।

Updated on:
19 Oct 2026 05:21 pm
Published on:
19 Oct 2026 05:21 pm
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