घर से बाहर निकलते समय लोग टोपी व चश्मा लगाते भी देखे जा रहे हैं
जौनपुर. गर्मी बढ़ती ही जा रही है। लू के थपेड़े शरीर को बेध रहे हैं। मौसम का अभी तल्ख तेवर देख आशंका जताई जा रही है आने वाला समय खास मुश्किल भरा होगा है। गर्मी ने लोगों को बेहाल करके रख दिया है। गर्मी के कारण सुबह 10 बजते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। दुकानों पर ग्राहकों का अभाव देख व्यापारी भी शटर गिराकर आराम फरमाते देखे जा रहे हैं। गर्मी के ओलदगंज सहित जगह-जगह जिले भर की बाजारों में मटका, सुराही आदि की दुकानें सज गईं हैं। धूप व लू जैसी गर्म हवाओं ने राहगीरों का जीना मुहाल कर रखा है। घर से बाहर निकलते समय लोग टोपी व चश्मा लगाते देखे जा रहे हैं। वहीं महिलाएं भी सूती कपड़ों से पूरे शरीर को ढककर ही कहीं निकल रही हैं।
उल्टी, दस्त, बुखार, सर्दी, डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मां का दूध ही गर्मी में नवजात शिशु की देखभाल करेगा। अगर ज्यादा देर तक शिशु भूखा रहता है तो उसे डी-हाइड्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर इस मौसम में बच्चे को मां का दूध पेट भर नहीं मिलता है उस के बीमार होने के ज्यादा संभावना रहती है, क्योंकि नवजात के जन्म से एक साल तक मां के दूध से ही बच्चे के शरीर की सारी आवश्यकताएं पूरी होती रहती हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. अभिषेक मिश्रा का कहना है कि फिर भी आवश्यक है तो छह माह के बाद दिन में दो से तीन बार चम्मच से शिशु को उसकी इच्छानुसार स्वच्छ पानी दिया जा सकता है। जब भी बच्चा तेज बुखार के साथ सुस्त होगा, तो ऐसी गर्मी में हीट स्ट्रोक होने का खतरा रहता है। बच्चे में दौरे पड़ने और उल्टी-दस्त ओर बेहोशी हो जाने के साथ दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है। इस मौसम में नवजात शिशु को घर के अंदर ही रखें।