झाबुआ

झाबुआ में ‘चौथी स्टेज’ में पता चल रहा स्तन कैंसर, 278 महिलाएं शिकार, इग्नोर न करें ये 3 खतरनाक लक्षण

Breast Cancer Awareness Day: पिछले चार साल में स्तन कैंसर के 278 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें कई महिलाएं जागरूकता की कमी से एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंच रही हैं।
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Oct 13, 2026
स्तन कैंसर , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
स्तन कैंसर , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Breast Cancer Awareness Day: मध्यप्रदेश के झाबुआ के आदिवासी अंचल से सामने आए स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर के आंकड़े गंभीरता से सोचने को मजबूर करते हैं। यहां पिछले चार साल में स्तन कैंसर के 278 नए मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जागरूकता की कमी, संकोच और लक्षणों को नजरअंदाज करने के कारण कई महिलाएं बीमारी के एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद अस्पताल आ रही हैं। ऐसे में इस नवरात्र पूजा-अर्चना के साथ ही नारी शक्ति स्वरूपा महिलाओं को भी इस बीमारी से बचाने के लिए जागरूकता का अभियान शुरू करने का भी संकल्प लेना होगा। परिवार, समाज और स्वास्थ्य तंत्र को मिलकर महिलाओं को बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने, बिना झिझक जांच कराने और समय पर उपचार लेने के लिए प्रेरित करना होगा। क्योंकि नारी शक्ति की सच्ची आराधना उसके जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा से भी जुड़ी हुई है।

इलाज की सुविधा बढ़ी, अब जागरूकता की बारी

जिला अस्पताल में स्तन कैंसर के उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस साल सामने आए 58 नए मरीजों में से 12 महिलाओं की सर्जरी की जा चुकी है, जबकि 30 मरीजों को कीमोथेरेपी दी जा रही है। उपचार की उपलब्धता के साथ अब जरूरी है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं तक बीमारी से जुड़ी सही जानकारी पहुंचे। आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों, महिला समूहों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। महिलाओं को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी है कि जांच कराने में संकोच करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना उनके जीवन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

चार साल में 278 मामले, आंकड़े दे रहे चेतावनी

जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, झाबुआ में स्तन कैंसर के मामलों में बीते वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2023 में 36, वर्ष 2024 में 75, वर्ष 2025 में 109 और वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में 58 नए मामले सामने आए। इस तरह चार साल में कुल 278 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2025 में मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। ये आंकड़े महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने की जरूरत रेखांकित करते हैं।

बीमारी से बड़ी चुनौती, देर से अस्पताल पहुंचना

जिला अस्पताल के कैंसर सर्जन डॉ. देवेंद्र भायल के अनुसार, आदिवासी अंचल में बड़ी चुनौती मरीजों का बीमारी के शुरुआती चरण में अस्पताल नहीं पहुंचना है। कई महिलाएं संकोच या जानकारी के अभाव में गांठ और दूसरे लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती हैं। जब वे अस्पताल पहुंचती हैं, तब तक बीमारी तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुकी होती है। ऐसी स्थिति में उपचार अधिक जटिल हो जाता है। इसके विपरीत, शुरुआती चरण में पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। इसलिए शरीर में किसी भी तरह की असामान्य गांठ या बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गठान दिखे तो संकोच नहीं, जांच कराएं

-स्तन या बगल में नई गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या असामान्य स्राव दिखे तो चिकित्सकीय सलाह लें।
-हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन जांच के बिना इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।
-स्तन की स्वयं जांच अपने शरीर में बदलाव पहचानने में मदद कर सकती है, लेकिन यह चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं है।
-इलाज की सुविधा बढ़ी, अब जागरूकता की बारी: जिला अस्पताल में स्तन कैंसर के उपचार की सुविधाएं उपलब्ध है। इस साल सामने आए 58 नए मरीजों में से 12 महिलाओं की सर्जरी की जा सकी है
-उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से स्क्रीनिंग की सलाह लें। मैमोग्राफी कब और कितनी बार करानी है, यह चिकित्सक से तय करें।
-स्तन कैंसर का इलाज संभव है। बीमारी की शुरुआती पहचान से उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

Updated on:
13 Oct 2026 01:48 pm
Published on:
13 Oct 2026 01:48 pm