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रील्स के दौर में जेन-जी की अलग पहचान बनी झाबुआ की सिल्की, 22 की उम्र में लिख डाला अंग्रेजी उपन्यास

Inspirational Story : 300 से ज्यादा किताबें पढ़ने के बाद शुरू किया लेखन। अपने अनुभवों और यात्राओं को 121 पन्नों में उतारा। 'द नाइट आई चोज मायसेल्फ' से बनाई अलग पहचान, सोच-युवा पढ़ने के साथ अपने विचारों को लिखने की भी आदत डालें।
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झाबुआ

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Mohammad Faiz Mubarak

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Updated: 4 Nov 2026, 8:59 PM IST

Inspirational Story

किताब के साथ लेखिका सिल्की सोलंकी (फोटो सोर्स: Patrika)

Jhabua News : जेन-जी यानी जनरेशन-जेड की पहचान अकसर सोशल मीडिया, रील्स और डिजिटल दुनिया से जोड़कर देखी जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के झाबुआ में रहने वाली 22 वर्षीय सिल्की सोलंकी ने इस दौर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब युवा घंटों स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं, तब सिल्की ने 300 से अधिक किताबें पढ़कर न सिर्फ पढ़ने की आदत को अपना जुनून बनाया, बल्कि इसी जुनून को रचनात्मकता में बदलते हुए अपना पहला अंग्रेजी उपन्यास भी लिख डाला।

सिल्की के डेब्यू नॉवेल 'द नाइट आई चोज़ मायसेल्फ' ने उन्हें कम उम्र में ही लेखन की दुनिया में एक नई पहचान दी है। सिल्की का ये सफर अचानक शुरू नहीं हुआ। बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वर्तमान में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर कर रही हैं। स्कूल के दिनों से ही उन्हें किताबें पढ़ने का शौक था, लेकिन कॉलेज के पहले साल में अच्छी लाइब्रेरी मिली तो ये शौक जुनून में बदल गया।

300 से अधिक किताबें पढ़ चुकीं हैं सिल्की

अब तक 300 से अधिक किताबें पढ़ चुकीं सिल्की सोलंकी ने शायरी और कविताओं से लेखन की शुरुआत की। इसके बाद शॉर्ट फिल्मों, विज्ञापनों और सोशल मीडिया कंटेंट के लिए फ्रीलांस राइटिंग की। धीरे-धीरे शब्दों से जुड़ा ये सफर एक पूरी किताब तक पहुंच गया।

रील्स की दुनिया से किताबों के पन्नों तक

अस्तित्व प्रकाशन से प्रकाशित 121 पन्नों की ये किताब महज काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि आत्मखोज और यात्राओं के अनुभवों का संगम है। पिछले साल की एक यात्रा ने सिल्की को खुद को नए नजरिए से समझने का मौका दिया। इसी अनुभव से उपन्यास का विचार जन्मा। किताब में एक ऐसी लड़की की यात्रा को बयां किया गया है, जो नए लोगों, खूबसूरत जगहों, रिश्तों और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच अपनी पहचान तलाशती है। इसमें प्रेम, रिश्तों और आत्मसम्मान के बीच संतुलन बनाने का भी खास संदेश है।

किसी और को चुनने से पहले खुद को चुनना जरूरी

सिल्की के उपन्यास का शीर्षक 'द नाइट आई चोज़ मायसेल्फ' ही इसकी मूल भावना को बयां करता है। उनका मानना है कि, प्यार करना और किसी का साथ पाना जिंदगी के खूबसूरत अनुभव है, लेकिन इस दौरान खुद को खो देना सही नहीं है। जिंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ वो होता है, जब इंसान किसी दूसरे को चुनने से पहले खुद को चुनना सीखता है। यही सोच उनकी किताब के केंद्र में है।

जेन-जी को फिर किताबों से जोड़ना चाहती हैं सिल्की

एक युवा लेखिका के रूप में सिल्की चाहती हैं कि, आज की पीढ़ी केवल डिजिटल कंटेंट तक सीमित न रहे, बल्कि किताबों से भी अपना रिश्ता मजबूत करे। समाज में रीडिंग कल्चर फिर विकसित हो और युवा पढ़ने के साथ अपने विचारों को लिखने की भी आदत डालें। उनकी किताब खासकर उन युवाओं और महिलाओं के लिए है, जो रोजमर्रा की भागदौड़, जिम्मेदारियों और दूसरों की अपेक्षाओं के बीच अपनी इच्छाओं और पहचान को पीछे छोड़ देते हैं।