झाबुआ

चरनोई की जमीन पर पहले अवैध खनन, अब कट रही कॉलोनी!

जमीन सरकारी रिकॉर्ड 59-60 में चरनोई की भूमि के नाम से दर्ज है, तहसीलदार ने माना, हुआ करोड़ों का अवैध खनन

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Nov 04, 2019
चरनोई की जमीन पर पहले अवैध खनन, अब कट रही कॉलोनी!

झाबुआ. शासन के रिकॉर्ड में जो जमीन सरकारी थी, अब निजी गई है। अफसरों ने नियमों की अनदेखी करके चरनोई की एक भूमि का मालिकाना हक कुछ निजी लोगों को दे दिया। खास बात यह है कि इसी जमीन पर पहले अवैध खनन किया गया। जमीन निजी लोगों को सौंपने के साथ ही यहां अब एक कॉलोनी भी कटना शुरू हो गई है।

नियमानुसार चरनोई की भूमि की किसी भी हालत में रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है। पत्रिका के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि शहर से सटे रतनपुरा की पहाडिय़ों को पहले काटकर समतल किया गया। फिर इस समतल जमीन पर कॉलोनी काटने की अनुमति जारी कर दी गई। जो पहाडिय़ां काटी गईं हैं वे सरकारी रिकार्ड 59-60 में चरनोई की भूमि के नाम से दर्ज हैं। इस संबंध में कॉलोनाइजर मयंक रूनवाल का कहना है कि हमने सभी अनुमति लेकर काम चालू किया है।

कॉलोनी काटने की अनुमति दी
कॉलोनी काटने की अनुमित दी है। कॉलोनाइजर के पास इसका लाइसेंस है। नगर व निवेश से नक्शा भी पास किया गया है। सभी विभागों की सहमति से कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी गई है।
एपीएस चौहान, अपर कलेक्टर झाबुआ

करोड़ों रुपए का अवैध खनन किया
&मैंने मौके पर जाकर रिपोर्ट बनाई थी। रतनपुरा की पहाडिय़ों को मशीनों से खोदकर समतलीकरण किया गया है। इन पहाडिय़ों को काटकर करोड़ों रुपए का अवैध खनन किया गया है।
-बीएस भिलाला, तहसीलदार झाबुआ

इनके नाम की गई रजिस्ट्री
परिवर्तित भूमि सर्वे नंबर -०६/1 रकबा ०.१८० हेक्टेयर परि लगान 1440 रुपए, 7 / 1 रकबा -0. १८० हेक्टेयर परि लगान 1440 रुपए। सर्वे नंबर- 7 / 2 रकबा ०.७२० परि लगान ५६६० रुपए। सर्वे 8 / 1 रकबा -०.१८६ हेक्टेयर परि. लगान -1440 रुपए। सर्वे 8 / 2 रकबा -०.७२० हेक्टेयर परि. लगान ५७६० रुपए की भूमि भू स्वामी अंजू पति प्रमोद भंडारी, महिपाल पिता नरेंद्र सिंह, पद्मा पति महिपाल, मोहित, मयंक पिता महिपाल रुनवाल के नाम चरनोई की भूमि की रजिस्ट्री की गई। जमीन की रजिस्ट्री वर्ष 2019-20 में की गई।
क्या है चरनोई की भूमि
ठ्ठ चरनोई की भूमि पर खुदाई नहीं कर सकते।
ठ्ठ इस जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता।
ठ्ठ केवल पट्टे पर दी जा सकती है भूमि।
ठ्ठ खेती या घास उगाने या पेड़ लगाने के लिए पट्टा दिया जा सकता है।
ठ्ठ खेती के अलावा कोई दूसरा व्यावसाय इस भूमि पर नहीं कर सकते।
ठ्ठ पट्टा धारक के बाद यह जमीन शासन के पास वापस आएगी।
ठ्ठ इस जमीन को बेचा नहीं जा सकता है।
ठ्ठ इस भूमि की रजिस्ट्री किसी भी नियम से नहीं की जा सकती है।

Published on:
04 Nov 2019 11:08 pm
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