झाबुआ

दूसरों की खुशियों में ढोल बजाने वाला शंकर आज मुश्किल में, पूरे शहर ने थाम लिया हाथ

Community Raises Funds for Cancer Patient-कैंसर से जंग लड़ रही पत्नी अनीता को देख पसीजा शहर का दिल, 111 रुपए से लेकर 10 हजार तक का सहयोग, 64,600 रुपए जुटाकर दी उम्मीद की नई रोशनी...।

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Jun 15, 2026
Jhabua Dhol Player Cancer Support
Jhabua Dhol Player Cancer Support- झाबुआ के लोगों ने पेश की मानवता की मिसाल। (फोटो पत्रिका)

Jhabua Dhol Player Cancer Support- खुशियों के हर मौके पर जब ढोल की थाप गूंजती है, तो लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। बरसों से झाबुआ के विवाह समारोहों, त्योहारों और मांगलिक आयोजनों में अपनी ढोल की थाप से माहौल में उत्साह भरने वाले शंकर भाई बसौड़ आज खुद जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहे हैं। उनकी पत्नी अनीता गर्भाशय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण इलाज मुश्किल होता जा रहा था, लेकिन इस कठिन घड़ी में पूरा शहर उनके साथ खड़ा हो गया। शहरवासियों ने न केवल संवेदनशीलता दिखाई, बल्कि मदद के लिए आगे बढ़कर यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। लोगों के सहयोग से 64,600 रुपए की राशि एकत्रित कर शंकर भाई को सौंपी गई। यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उम्मीद, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गई।

जब संकट आया, तो शहर ने थाम लिया हाथ

शंकर भाई की पत्नी अनीता का इलाज अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चल रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय और बड़े खर्च की मांग करता है। सीमित आय में परिवार का खर्च चलाने वाले शंकर भाई के लिए यह बोझ असहनीय होता जा रहा था। जब उनकी परेशानी की जानकारी शहर के कुछ जागरूक नागरिकों और समाजसेवियों तक पहुंची, तो उन्होंने मदद की मुहिम शुरू की। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील की गई। देखते ही देखते यह पहल जनसहयोग के अभियान में बदल गई।

किसी ने 111 दिए, किसी ने 10 हजार…हर सहयोग बना अमूल्य

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें समाज का हर वर्ग जुड़ा। किसी ने 111 रुपए का शगुन दिया, तो किसी ने 151 रुपए की छोटी लेकिन दिल से निकली मदद की। वहीं कई लोगों ने हजारों रुपए का सहयोग देकर परिवार का मनोबल बढ़ाया। झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने 10 हजार रुपए की सहायता प्रदान की। इसके अलावा शहर के कई प्रतिष्ठानों और व्यापारिक संस्थानों ने भी सहयोग किया। बालाजी मोटर्स, सत्कार रेस्टोरेंट, जैन प्लाइवुड सहित अनेक लोगों ने खुलकर मदद की, जबकि कई दानदाताओं ने गुप्त रूप से राशि देकर मानवता का परिचय दिया।

सोशल मीडिया बना उम्मीद का पुल

अक्सर आलोचनाओं के घेरे में रहने वाला सोशल मीडिया इस बार किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हुआ। एक संदेश ने लोगों को जोड़ा और देखते ही देखते सैकड़ों हाथ मदद के लिए आगे बढ़ गए। इस अभियान ने यह भी साबित कर दिया कि तकनीक का उपयोग यदि अच्छे कार्यों के लिए हो तो वह किसी की जिंदगी बदल सकती है।

राशि मिली तो छलक पड़े आंसू

शनिवार को जब शहर के गणमान्य नागरिकों और अभियान से जुड़े लोगों ने एकत्रित 64,600 रुपए की राशि शंकर भाई को सौंपी, तो उनकी आंखें नम हो गईं। भावुक शंकर भाई के पास शहरवासियों का आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं

यह सिर्फ मदद नहीं, इंसानियत की मिसाल है

यह घटना बताती है कि किसी भी समाज की असली ताकत उसकी संवेदनशीलता और एकजुटता में होती है। जब एक ढोल वादक की जिंदगी मुश्किलों से घिर गई, तब पूरा शहर उसके परिवार की ढाल बनकर खड़ा हो गया। यह सहयोग केवल पैसों का नहीं, बल्कि उस विश्वास का है जो किसी भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में टूटने नहीं देता। आज पूरा झाबुआ अनीता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है और यह संदेश दे रहा है कि दुख की घड़ी में कोई भी अकेला नहीं है।

Published on:
15 Jun 2026 03:57 pm