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‘चला गया जिगर का टुकड़ा…’ रातभर ‘गौरांश’ के शव को सीने से चिपकाए रहे मम्मी-पापा, राणापुर में दी गई अंतिम विदाई

Nainital hotel accident: सराफा कारोबारी के तीन साल के बेटे की नैनीताल में होटल की तीसरी मंजिल से गिरने से मौत हो गई। बीते दिन बाल श्मशान में गौरांश को अंतिम विदाई दी गई।
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Nainital hotel accident: बाल श्मशान में गौरांश को अंतिम विदाई दी गई (Photo Source - Patrika)

Nainital hotel accident: बाल श्मशान में गौरांश को अंतिम विदाई दी गई (Photo Source - Patrika)

Child death in accident: मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठे। जिन आंखों में खूबसूरत वादियों के नजारे और खुशियां तैर रही थीं, आज उनमें सिर्फ आंसुओं का सैलाब है। नैनीताल में छुट्टियां मनाने गया सोनी परिवार जब अपने 3 साल के इकलौते चिराग का शव लेकर वापस लौटा, तो पूरे नगर में मातम पसर गया।

दरअसल, राणापुर निवासी विशाल सोनी अपनी पत्नी सुरभि और 3 साल के बेटे गौरांश के साथ 1 जुलाई को परिवार के अन्य 22 सदस्यों के साथ नैनीताल घूमने निकले थे। लेकिन रविवार की सुबह नियति ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि परिवार की सारी खुशियां पल भर में उजड़ गई।

खेलते-खेलते खिड़की से गिरा मासूम, थम गई सांसें

रविवार सुबह नैनीताल के एक होटल में नन्हा गौरांश खेलते-खेलते अचानक तीसरी मंजिल की खिड़की से करीब 20 फीट नीचे जा गिरा। मासूम के गिरते ही होटल में चीख पुकार मच गई। ऊंचाई से गिरने के कारण उसके सिर और गर्दन में गंभीर चोटें आई। गौरांश को परिजन आनन-फानन में पहले नैनीताल और फिर वहां से हल्द्वानी ले गए। हालत नहीं सुधरने पर उसे दिल्ली रेफर कर दिया, लेकिन दिल्ली में इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया।

रोते बिलखते राणापुर तक का सफर

गौरांश को जिंदा वापस लाने की मम्मी-पापा की उम्मीदें दिल्ली तक गई थीं, वे वहां हमेशा के लिए टूट गई। जिस बच्चे को माता-पिता ने सीने से लगाकर नैनीताल की वादियों की सैर कराई थी, उसी बच्चे के बेजान शव को सीने से लगाकर वे रातभर सफर करते रहे। रोते-बिलखते सोनी दंपति सोमवार सुबह जब अपने लाल का शव लेकर राणापुर पहुंचे, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन हो गया।

मन्नतों का चिराग था गौरांश, दादा हो गए बेसुध

विशाल और सुरभि की शादी के चार साल बाद कई मन्नतों और दुआओं के बाद गौरांश का जन्म हुआ था। वह अपने घर का इकलौता चिराग था और अपने दादा अनिल सोनी की आंखों का तारा था। गौरांश पूरे दिन अपने दादा के पास ही रहता था। अपने जिगर के टुकड़े के अचानक दुनिया से चले जाने की खबर से दादा अनिल बुरी तरह स्तब्ध और बेसुध है।

बाल श्मशान में दी गई अंतिम विदाई

सोमवार को राणापुर में हर तरफ खामोशी और मातम था। स्थानीय बाल श्मशान पर विधि-विधान से नन्हे गौरांश का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार जिस वैष्णोदेवी की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहा था, वह यात्रा अधूरी ही रह गई और हमेशा के लिए एक ऐसा घाव दे गई. जिसे वक्त भी शायद ही कभी भर पाए।