नए साल मेें पुरूषोत्तम मास होने से दो ज्येष्ठ महीने
झालावाड़/सुनेल. ज्योतिष के अनुसार साल 2018 के नए विक्रम संवत 2075 में ज्येष्ठ के दो महिने होंगे। 2018 में ज्येष्ठ मास 1 मई से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन अधिकमास का समय 16 मई से 13 जून तक रहेगा। इसे पुरूषोत्तम मास भी कहा जाएगा। इस मास में मंागलिक कार्यों पर ब्रेक रहेगा, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान आदि कार्य होंगे।
ज्योतिषाचार्य सोहन जोशी ने बताया कि ज्येष्ठ वाला अधिकमास दस वर्ष बाद होगा, इससे पहले 2007 में ज्येष्ठ में अधिकमास का योग बना था। 1 मई से 28 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार सौर मास 12 राशियां भी 12 होती है। जब दो पक्षों में संक्रान्ति नहीं होती तब अधिकमास होता है। अधिकमास शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होकर कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। हर तीसरे वर्ष अधिकमास का संयोग बनता है। ऐसा सूर्य व पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटते-बढऩे के कारण होता है।
क्या और कब होता है अधिकमास-
जोशी के अनुसार व्रत-पर्वोत्सव में चंद्र माह की गणना को आधार माना जाता है। चंद्रमास 354 दिनों का जबकि सौरमास 36 5 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है, तो तीन वर्ष में एक माह से कुछ ज्यादा हो जाता है। 32 माह 16 दिन और चार घड़ी के अंतर से अधिकमास आता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्मशास्त्रों में अधिकमास की व्यवस्था की गई है।
पौराणिक मान्यता-
प्राचीन काल में सर्वप्रथम अधिक मास की उत्पत्ति हुई। उस मास में सूर्य संक्रमण होने के कारण वह मंगल कार्यों के लिए ग्रह नहीं माना गया। लोग उसकी निंदा करने लगे। बारह मास, तिथि, ग्रह नक्षत्र, कलाओं, उत्तर दक्षिण अयन, संवत्सर आदि ने अधिकमास बैकुंठ में भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो भगवान ने उसे आशीर्वाद दिया कि मेरा नाम जो वेद, लोक एंव शास्त्र में वि?यात है, आज से उसी पुरूषोत्तम नाम से यह मलमास विख्यात हुआ।
अधिकमास में ये रहेगा वर्जित-
उपाकर्म, ग्रहप्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत, विवाह, यात्रा, सगाई, वास्तु कार्य, व्यापार आरंभ, देव प्रक्रिया, बोरिंग-कुआंखुदवाना, तुलादाल आदि मंागलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। वहीं दान-पुण्य, पूजा-पाठ कथा का कार्य श्रेष्ठ रहेगा।
भगवान की भक्ति से नववर्ष का स्वागत -
.जिलेभर में नववर्ष की पूर्व संध्या पर विशेष आयोजनों एवं समारोहों की धूम रही। वहीं सोमवार को मंदिरों में नववर्ष को लेकर भीड़ रही। शहर के राजराजेश्वर शिव मंदिर, गढ़ गणेश मंदिर, ं राड़ी एवं खेजड़ी के बालाजी पर सुबह से दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शहर में ईच्छापूर्ण हनुमान मंदिर पर नववर्ष की पूर्व संध्या पर रविवार शाम को हनुमान प्रतिमा को विशेष चोला धारण कराया गया। रविवार देर रात को यहां संगीतमय सुंदरकांड का आयोजन किया। इसमें बनी झांकी में हनुमान बने भारत बनाशा ने लोगों का मनमोह लिया। यहीं संगीतमय सुंदरकांड के बीच लोगों ने नृत्य भी किया।