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बड़ी खुशखबरी: युद्ध के बीच फंसे झालावाड़ के कारोबारी दंपती लौटे वतन, सुनाई जियारत की अनोखी दास्तां

Rajasthan News: मध्य पूर्व में युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच झालावाड़ जिले के खानपुर निवासी वरिष्ठ व्यवसायी कुतुबुद्दीन बोहरा और उनकी पत्नी ताहिरा बोहरा इराक की जियारत पूरी कर सकुशल घर लौट आए।

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Qutbuddin Bohra

फोटो: पत्रिका

Businessman Qutbuddin Bohra Returned India: मध्य पूर्व में युद्ध के तनावपूर्ण हालात के बीच इराक के धर्म स्थलों की जियारत कर नगर के वरिष्ठ व्यवसायी कुतुबुद्दीन बोहरा और उनकी धर्मपत्नी ताहिरा बोहरा रविवार को करीब डेढ़ माह बाद सकुशल घर लौट आए।

रविवार सुबह मुंबई से ट्रेन द्वारा रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पहुंचने पर परिजनों ने दोनों का स्वागत किया। इसके बाद खानपुर आगमन पर नगर के आधा दर्जन स्थानों पर आतिशबाजी और स्वागत द्वारों के बीच दंपति का अभिनंदन किया। कुतुबुद्दीन बोहरा ने सभी परिजनों, बोहरा समाज, सर्व समाज तथा विशेष रूप से राजस्थान पत्रिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी सकुशल वापसी के लिए की गई दुआओं के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

बढ़ी जियारत की अवधि

कुतुबुद्दीन बोहरा ने बताया कि वे 16 फरवरी को भारत से लगभग 35 दिन की जियारत के लिए इराक के नजफ और कर्बला गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद ईरान-इजराइल व अमेरिका के बीच बने तनावपूर्ण हालात के चलते उनकी यात्रा अवधि बढ़कर करीब 45 दिन हो गई। सामान्य परिस्थितियों में उनकी वापसी 22 मार्च को होनी थी, लेकिन सऊदी अरब का वीजा नहीं मिलने से उन्हें कर्बला में अतिरिक्त दिनों तक रुकना पड़ा और परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार करना पड़ा।

बिना वीजा तीन देशों की भी जियारत

बोहरा ने बताया कि युद्ध के दौरान विपरीत परिस्थितियां उनके लिए अवसर साबित हुईं । उनके पास केवल इराक का वीजा था और उन्हें सऊदी अरब के एयरपोर्ट से 22 मार्च को हवाई जहाज से भारत पहुंचना था, लेकिन सऊदी अरब का वीजा नहीं मिलने से वे क़र्बला में अटक गए । इस दौरान धर्मगुरु के मार्गदर्शन व सहयोग से वे कर्बला से बस द्वारा जॉर्डन पहुंचे । जहां लगभग 36 घंटे रुककर विभिन्न धार्मिक स्थलों की जियारत की ।

इसके बाद वे ओमान होते हुए मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंचे, जहां करीब पांच घंटे का समय मिला और वहां भी उन्होंने जियारत का लाभ लिया । उसके बाद वे तीन अप्रेल को मुंबई पहुंचे । उन्होंने बताया कि इस तरह बिना वीजा तीन देशों जॉर्डन, सीरिया और मिस्र की जियारत का दुर्लभ अवसर मिला, जो उनके जीवन की अविस्मरणीय अनुभूति बन गया ।

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