Jhalawar Murder: झालावाड़ जिले में पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खून का रूप ले लिया। सजा काटकर लौटे कालूलाल भील की कथित तौर पर बदले की भावना में हत्या कर दी गई, जिसमें तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है।
Murder Committed Due To Feud: झालावाड़ जिले के अकलेरा थाना क्षेत्र के मदनपुरिया चुरेल गांव में मंगलवार को सजा काटकर लौटे युवक की हत्या के मामले में नया खुलासा सामने आया है। अपने पति की हत्या का बदला लेने के लिए पत्नी ने ननद के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया।
अकलेरा थाना इलाके में मदनपुरिया निवासी 40 वर्षीय कालूलाल भील कुछ साल पहले गांव के ही भैरूलाल की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत से सात साल की सजा काटने के बाद वह गत सोमवार को ही अपने गांव मदनपुरिया लौटा था। मंगलवार दोपहर गांव के पास एक खेत में उसका शव लहूलुहान हालत में मिला। शरीर पर धारदार हथियार से हमले के निशान मिले। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अकलेरा अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि कालूलाल की हत्या भेरूलाल की पत्नी काली बाई (35) ने ननद केदार बाई (25) और प्रेम बाई (32) व चाचा हीरालाल (40) चारों ने खेत पर मिले कालूलाल की धारदार हथियार से हत्या कर दी। पुलिस ने तीनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं हीरालाल अभी फरार है।
केदार बाई पढ़ी-लिखी है, उसने बीएससी- बीएड की पढ़ाई की है और निजी संस्थान में योगा टीचर के रूप में काम करती है। वहीं दूसरी बहन के 3 बच्चे और पत्नी के भी 2 मासूम बच्चे हैं।
गांव में चर्चा है कि यह हत्या नहीं बल्कि पुराना हिसाब था। 2021 में कालूलाल ने भैरूलाल की हत्या की थी, जिससे उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा था। भैरूलाल परिवार का कमाने वाला अकेला सदस्य था, जिसके पीछे बूढ़ा पिता, पत्नी, दो बच्चे और तीन बहनें थी। उसी रंजिश की चिंगारी वर्षों बाद भड़क उठी और कालूलाल को जेल से छूटते ही मार डाला।
इस घटना ने दो परिवारों के बच्चों का भविष्य संकट में डाल दिया। काली बाई के दो बेटे विशाल (13) और अरुण (10) हैं। प्रेम बाई, जिनके पति का पहले ही निधन हो चुका है, अपनी तीन बेटियों काजल (11), निशा (10) और प्रिंशा (7) का पालन-पोषण कर रही थी। अब तीनों महिलाएं पुलिस की गिरफ्त में हैं और घर में बुजुर्ग दादा-नाना पर बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। वहीं परिवार के सामने रोजी-रोटी से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया है। गांव में चर्चा है कि भाई की मौत का दर्द बहनों के भीतर सालों से दबा था, जो अंततः प्रतिशोध में बदल गया।
यह घटना सिर्फ हत्या की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक सच्चाई का आईना है जिसमें बदले की आग पूरे परिवार को जला देती है। एक हत्या का प्रतिशोध दूसरी हत्या से लेने की मानसिकता ने दो परिवारों की पीढ़ियों को संकट में डाल दिया। गांव के बुजुर्ग कहते हैं रंजिश का अंत कभी जीत में नहीं होता, वह हमेशा किसी न किसी घर की हार बन जाती है।
मदपुरिया चुरेल गांव में हुई घटना में तीन आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है, चौथे आरोपी की तलाश में टीमें रवाना की गई है।
अमित कुमार पुलिस अधीक्षक, झालावाड़