झालावाड़

अब तक 99 कौओं की मौत, मुर्गियों एवं अन्य के 21 सैंपल भेजे

भोपाल स्थित प्रयोगशाला में होगी जांच

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अब तक 99 कौओं की मौत, मुर्गियों एवं अन्य के 21 सैंपल भेजे

झालावाड़. बर्ड फ्लू से कौओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहीं कारण है कि पक्षियों में लगातार कोओं की मौत सामने आने के बाद अब पशुपालन विभाग की टोलियां पूरे जिले में घूम कर पक्षियों के सैंपल ले रही है। शनिवार को भी बर्ड फ्लू से 11 कौओं एवं एक कोयल की मौत हुई। इनमें राड़ी के बालाजी क्षेत्र में 8 जबकि मुंडेरी से 1 एवं मनोहरथाना में 3, अकलेरा एवं सुनेल से एक-एक कौए की मौत हुई। जबकि एक कोयल की मौत राड़ी के बालाजी क्षेत्र में हुई। इस तरह अब तक कुल 99 कौओं की मौत पशुपालन विभाग ने मानी है।
21 सैंपल और भेजे
पिछले दो दिनों में पोल्ट्री फार्म से लिए मुर्गियों एवं पक्षियों के बीट के करीब 21 सैंपल शनिवार को सुबह एक वाहन से भोपाल स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे। इनकी रिपोर्ट मंगलवार तक विभाग को मिलने की संभावना अधिकारियों ने जताई। जबकि शुक्रवार को भी एक साथ 16 कौओं की मौत हुई। इसके बाद प्रशासन ने एक बार फिर से राड़ी के बालाजी क्षेत्र को जीरोमोबिलिटी घोषित किया। यहां पशुपालन विभाग की टीम के अलावा अन्य किसी को जाने की इजाजत नहीं है। राड़ी के बालाजी क्षेत्र में प्रवेश पर रोक के लिए बेरिकेड्स लगा कर पुलिस के जवान लगा रखे है। मृत कौओं में से कुछ के सैंपल जांच के लिए दुबारा भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेज दिए है। जबकि कुछ कौओं को इसी परिसर के आगे करीब 150 मीटर के क्षेत्र में एक गड्ढ़ा खोद एक पशु चिकित्सालय के कार्मिक ने पीपीई किट पहन कर उनका निस्तारण किया।
बर्ड फ्लू का विशेष वायरस जो कौओं को ही प्रभावित कर रहा
बर्ड फ्लू से लगातार हो रही मौतों के मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बर्ड फ्लू का खतरा अभी टला नहीं है। लगातार कौओं की मौत और बीमारी बढऩे की और संकेत दे रही है। हालांकि पूरे प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। कौओं की मौत ही इससे होना यह एक विशेष प्रकार का वायरस है जो सिर्फ कौओं की प्रभावित कर रहा है। अभी तक जिले में कौओं के अलावा मात्र एक कोयल की ही मौत इस वायरस से होना सामने आया है।
इंसानों में ना पहुंंच जाए वायरस
पशु विशेषज्ञों ने बताया कि एवियन इंफ्लूएंजा एक तरह से बर्ड फ्लू होता है। यह वायरस जनित बीमारी है। जो एक पक्षी से दूसरे पक्षी में तेजी से फैलती है। यह बीमारी पालतु एवं जंगली पक्षियों की प्रजातियों को लगातार प्रभावित करती है। सामान्य रूप से यह संक्रमण पक्षियों में पाया जाता है। लेकिन कभी-कभी यह इंसानों को भी प्रभावित करता है। जब यह इंसान को प्रभावित करता है तो इसे इंफ्लूएंजा कहा जाता है। लगातार कौओं की मौत अब यह इंसानों में भी बीमारी फैलने की और ईशारा कर रही है। यदि कोई संबधित क्षेत्र या कौओं के संपर्क में आया तो।
-कौओं की लगातार मौत हो रही है। 21 सैंपल मुर्गियों एवं उनकी बीट के भेजे हैं। हालात खराब है। फिर भी लगातार विभाग की टोलियां दौरा कर नजर बनाए हुए है।
विक्रम, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग

Published on:
03 Jan 2021 12:10 am
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