गेहूं निर्यात का असर, गेहूं के दामों में तेजी, किसान खुश, उपभोक्ता नाखुश
झालावाड़. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उथल-पुथल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। इसका अब सीधा असर आम आदमी की थाली पर भी पडऩे लग गया है। रोटी महंगी हो गई है। केन्द्र सरकार की ओर से मिस्र को गेहूं निर्यात करने की घोषणा के बाद गेहूं के भावों में तेजी का रूख बना हुआ है। उधर गेहूं में तेजी की धारणा के चलते फ्लोर मिलो ने भी आटा का दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है। ब्रांडेड कम्पनियों का आटा 25 से 27 रुपए किलो पहुंच गया ह। रिटेलर में भी आटा 26 रुपए किलो बेचा जा रहा है। जो पिछले साल 21 से 22 रुपए किलो था। वहीं मंडियों में गेहूं ऊपर में बेस्ट क्वालिटी का 2400 से 2500 रुपए क्विंटल बिक रहा है। गेहूं के दाम बढऩे से किसान खुश है और उपभोक्ता नाखुश है।
सरसों और चने की आवक बढ़ी
इसी प्रकार इस वर्ष जनवरी से मार्च तक सरसों की आवक 70797 ङ्क्षक्वटल की रही और दाम भी 6605 रुपए प्रति क्विंटल रहे जबकि पिछले साल मार्च में इसके दाम 4660 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल थे। इसके साथ ही मंडी में चने की आवक पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक है, जनवरी से मार्च तक मंडी में 10247क्विंटल चने की आवक हुई और दाम 4402 रुपए प्रति क्विंटलरहे, जबकि पिछले वर्ष इसी समयावधि में चने की आवक 9811 क्विंटल रही थी और दाम 5614 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल थे। तहसील क्षेत्र में इस बार किसानों ने रबी फसलों में चना व गेहूं के साथ सरसों की फसल कि ज्यादा बुवाई की थी। धनिया का रकबा अन्य सालों की तुलना जैसा नहीं था। गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपए ङ्क्षक्वटल तय किया हुआ है जबकि मंडी में खुली नीलामी में यह ङ्क्षजस 2100 से 2200 रुपए तक बिक रही है।