
झालरापाटन. सरकार को लाखों रुपए का राजस्व देने के बावजूद हरिश्चन्द्र कृषि उपज मंडी में व्यापारियों व किसानों को उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
फसलें तैयार होने के बाद मंडी में विभिन्न जिंसों की हजारों बोरी की रोजाना आवक होती है। इसके बावजूद माल की नीलामी के लिए एक ही शेड उपलब्ध है। एक अन्य शेड का उपयोग समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद के काम आता है। मंडी की स्थापना के समय सीसी रोड बनाया गया था, जो अब जगह-जगह से उखड़ गया है।गड्ढे होने के साथ ही गिट्टी निकलने से वाहनों के आवागमन में परेशानी होने लगी है।
अतिरिक्त प्रभार
मंडी सचिव के पास यहां के अलावा अकलेरा कृषि उपज मंडी व कोटा फल मंडी का भी अतिरिक्त प्रभार होने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हंै। मंडी प्रशासन ने मंडी विकास योजना के तहत कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से राज्य सरकार को पूरे परिसर में सीसी रोड व 50 गुना 300 फीट का नीलामी यार्ड बनाने के प्रस्ताव बनाकर लम्बे समय से भेज रखे हंै। जिसकी सरकार ने अभी तक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति नहीं भेजी है। परिसर में किसानों के बैठने के लिए छाया व पीने के लिए पानी की कोई उपयुक्त व्यवस्था नहीं है।
लाइटें बंद, रात्रि में व्यापारियों व किसानों को जिंसों के चोरी होने का भय
मंडी परिसर की कई टावर लाइटें व अन्य लाइटें बंद हैं। इससे रात में अंधेरा रहने से व्यापारियों व किसानों की जिंस की बोरियां चोरी हो रही हैं। पीछे जंगल होने से जहरीले जीव आने का भय बना रहता है। परिसर स्थित एक शेड की छत वर्षों से क्षतिग्रस्त है, यह कभी भी गिर सकती है। परिसर में लगे अधिकांश सीसी टीवी बंद होने से सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है।
जिले के प्रमुख व्यापारिक नगर व सीएम क्षेत्र की मंडी में किसानों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
रामविलास राठौर, किसान
किसानों के लिए परिसर में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाना चाहिए। मंडी प्रबंधन ने किसान भवन का निर्माण यहां के बजाय झालावाड़ में करा दिया है। जिससे इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
रामेश्वर राठौर, किसान
मंडी परिसर में सीसी रोड व नीलामी शेड बनाने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज रखे हैं।
हरिमोहन बैरवा, सचिव कृषि उपज मंडी