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Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में बड़ा उलटफेर, पूर्व पालिका अध्यक्ष ने छोड़ी BJP, बहू के साथ कांग्रेस में शामिल

Rajasthan Nikay Chunav 2026: झालावाड़ के भवानीमंडी में नगर पालिका चुनाव से पहले कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने बहू पिंकी गुर्जर और पूर्व पार्षद सुगना गुर्जर के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया।
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कांग्रेस-भाजपा (फाइल फोटो: पत्रिका)

Rajasthan Nikay Chunav 2026: झालावाड़। भवानीमंडी नगर पालिका चुनाव की सरगर्मी के बीच कांग्रेस ने भाजपा को झटका दिया है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने पार्टी छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया। उनके साथ बहू एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष पिंकी गुर्जर और पूर्व पार्षद सुगना गुर्जर ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

कांग्रेस डग विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी चेतराज गेहलोत, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रोड सिंह परमार और नगर कांग्रेस अध्यक्ष विनय आस्तोलिया ने उन्हें पार्टी का दुपट्टा पहनाकर सदस्यता दिलाई। रामलाल गुर्जर हाल ही में नगर पालिका चुनाव के लिए गठित भाजपा की 11 सदस्यीय चुनाव समिति में सदस्य बनाए गए थे। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए झटका माना जा रहा है।

रामलाल ने कहा कि वे करीब 40 वर्षों से भाजपा में रहे। कांग्रेस में उन्हें सम्मान और प्रेम मिला, इसलिए उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया। चुनाव के ऐन समय तीन प्रमुख चेहरों के कांग्रेस में आने से स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा है।

भाजपा-कांग्रेस के सामने बोर्ड में बहुमत की चुनौती

उधर, नगर परिषद झालावाड़ में इस बार चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने का नहीं बल्कि सभापति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए सियासी समीकरण साधने का भी है। सभापति पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने के बाद नगर परिषद के 9 ओबीसी वार्ड सबसे अहम हो गए हैं। इन वार्डों से जीतने वाले ओबीसी पार्षद सभापति पद के संभावित दावेदार होंगे। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने इन 9 वार्डों में मजबूत उम्मीदवार उतारने की चुनौती है।

45 वार्डों वाली नगर परिषद में इस बार मुकाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं। भाजपा और कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। कई वार्डों में चतुष्कोणीय मुकाबला बनने की संभावना है। ऐसे में पिछले बोर्ड का गणित इस बार कितना कायम रहता है, यह चुनाव का सबसे बड़ा सवाल है।

9 वार्डों पर सबसे ज्यादा नजर

सभापति पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने से 9 ओबीसी वार्डों का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इन वार्डों में जीतने वाले ओबीसी पार्षदों को संभावित सभापति दावेदार के तौर पर देखा जाएगा। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की कोशिश में हैं, जो अपने वार्ड में जीत दर्ज करने के साथ बोर्ड में अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की स्थिति में भी हों। शहर में नौ प्रमुख वार्ड है जिनमें पिछड़ा वर्ग 4, 12, 14, 17, 26, 33 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला 1, 8, 21 शामिल है।

आज आखिरी दिन, सिंबल के साथ खुलेगा राज

नामांकन का सोमवार को अंतिम दिन है। भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। दोनों दलों में टिकट को लेकर अंतिम समय तक मंथन चल रहा है। बगावत और भितरघात की आशंका के चलते प्रत्याशियों की सूची को अंतिम समय तक रोककर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। माना जा रहा है कि अंतिम समय में पार्टी सिंबल के साथ तस्वीर साफ होगी।

सोमवार को नामांकन के आखिरी घंटों में कई वार्डों में टिकट की तस्वीर बदल सकती है। टिकट से वंचित दावेदारों के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने से कई वार्डों में मुकाबला और रोचक हो सकता है।

250 से ज्यादा उम्मीदवारों की संभावना

नगर परिषद के 45 वार्डों में इस बार 250 से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी तथा निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी से मुकाबला बहुकोणीय होगा। जिन वार्डों में दो प्रमुख दलों के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, वहां तीसरे और चौथे उम्मीदवार समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

किसको मिलेगा ‘किंगमेकर’ बनने का मौका

अगर भाजपा अपने पुराने 25 पार्षदों के आसपास प्रदर्शन दोहरा पाती है तो उसके लिए सभापति बनाने की राह आसान हो सकती है। वहीं कांग्रेस के सामने पिछले बोर्ड के समीकरण को पलटने की चुनौती है। दूसरी ओर निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार यदि कई वार्डों में मजबूत प्रदर्शन करते हैं तो बोर्ड गठन के बाद उनकी संख्या भले कम हो, लेकिन वे सभापति के चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।