झालावाड़

फीस ने रोकी निजी स्कूलों में दाखिले की रफ्तार

  -सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ा रुझान

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 फीस ने रोकी निजी स्कूलों में दाखिले की रफ्तार

झालावाड़. करीब पांच महीने लगातार स्कूल बंद रहने और पूूरा एक शिक्षा सत्र बिना स्कूल में कक्षा शिक्षण के घर पर अध्ययन करने के बाद अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुल चुके हैं। पहले एक पखवाड़े निजी और सरकारी स्कूलों में इन चार कक्षाओं के नामांकित विद्यार्थियों की उपस्थिति का जो डेटा सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। कोरोना के डेढ़ साल के दौरान बड़ी तादाद में निजी स्कूलों के विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हुए है। दो साल पहले जो निजी स्कूल में नामांकित विद्यार्थी थे,उसके हिसाब से देखे तो 60 फीसदी ही विद्यार्थी ही वापस स्कूल से जुड़े हैं।
जिले में प्राथमिक व माध्यममिक शिक्षा में करीब 11 हजार निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। ऐसे में निजी स्कूल संचालक हैरान और परेशान नजर आ रहे हैं कि उनके यहां नामांकित विद्यार्थी कहां चले गए है। सबसे बड़ी बात है कि पन्द्रह से बीस फीसदी विद्यार्थियों और अभिभावकों से फोन पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह बकाया स्कूल फीस भी है। जो शत प्रतिशत स्कूल वसूलना चाहते हैं और अभिभावक देने को तैयार नहीं है। ऐसे में झालावाड़ जिले में फिलहाल अभिभावक सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिला रहे हंैं। निजी के उलट हालात सरकारी स्कूलों में देखने को मिल रहे हैं। यहां पर दो साल पहले नामांकित और वर्तमान में नामांकित विद्यार्थियों के रेकॉर्ड में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। सरकारी स्कूलों में नामांकित विद्यार्थियों की अब स्कूल खुलने पर स्कूल में उपस्थिति भी 80 फीसदी के पार कर गई है। बड़ी तादाद में कोरोना काल में निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने बिना टीसी के अंक तालिका आदि के आधार पर भी स्कूलों मेें प्रवेश लिया था। अब निजी स्कूलों से टीसी निकलवा कर सरकारी में जमा करवा रहे हैं।

इतने विद्यार्थियों ने किया सरकारी का रुख-
जिले में प्राथमिक शिक्षा के स्कूलों में 1404 विद्यार्थियों ने तथा माध्यमिक शिक्षा के निजी स्कूलों के करीब 9786 विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में अध्ययन के लिए रुचि दिखाई। जबकि पिछले वर्ष प्राथमिक स्कूलों में 91 हजार, तथा माध्यममिक शिक्षा में 1 लाख 18 ही नामांकन था। जो अब बढ़ गया है।

तीसरी लहर भी बडी वजह-
निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम रहने की बड़ी वजह तीसरी लहर की आशंका भी है। अभिभावक जब तक तीसरी लहर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती है, बच्चे को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं, साथ ही चालू शिक्षा सत्र में अब स्कूल खुलने पर विद्यार्थी को भेजने के बाद तीसरी लहर की वजह से यदि फिर से स्कूल बंद हो गए और पूरा सत्र पिछले सत्र की तरह विद्यार्थी को प्रमोट करने के रुप में गुजरा तो उन पर बिना पढ़ाए स्कूल संचालकों के फीस वसूली करने का डर भी सता रहा है।

30 फीसदी ने कटाई टीसी-
कोरोना के कारण फीस जमा नहीं कराने के कारण करीब तीस-चालिस प्रतिशत विद्यार्थियों के अभिभावकों ने निजी स्कूलों से टीसी कटवा कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया है। क्योंकि अभिभावक को आशंका है कि कोरोना की तीसरी लहर के चलते अगर स्कूल बंद हो गए तो फीस जमा कराने का कोई फायदा नहीं होगा।

कोरोना में भी हुई पढ़ाई-
जिले के सरकारी स्कूलों में कोरोना काल में भी विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई हुई है। जबकि कई निजी स्कूलों में फीस लेने के बाद भी सही से पढ़ाई नहीं करवाई गई है। ऐसे में अब अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों की तरफ ज्यादा हो रहा है।

फैक्ट फाइल-
- जिले में सैकेंडरी स्कूल- 39
-जिले में सीनयिर सैकेंडरी स्कूल - 319
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल- 1335
-जिले में प्राथमिक निजी स्कूल- 303
- जिले में सीनियर सैकेंडरी निजी स्कूल- 157
- जिले में प्राथमिक शिक्षा में नामांकित विद्यार्थी- 91 हजार
- जिले में सैकेंडरी तक के नामांकित विद्यार्थी- 1 लाख 27 हजार ***** विद्यार्थी
- जिले में नामांकन बढ़ा 11 हजार 90।

सरकारी स्कूलों में बढ़ा अभिभावकों का रुझान-

जिले में 15-20 फीसदी विद्यार्थियों का सरकारी में प्रवेश हुआ है। जिसमें कोरोना काल के चलते भी आर्थिक परेशानी की वजह से सरकारी स्कूलों में अभिभावकों का रुझान बढ़ा है। सरकारी स्कूलों में कोरोना काल में भी नियमित ऑनलाइन पढ़ाई हुई है।
पुरूषोत्तम माहेश्वरी, डीईओ, माध्यमिक,झालावाड़।

Published on:
20 Sept 2021 04:12 pm
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