– स्कूली छात्रों का हथियार रखना चिंताजनक झालावाड़.प्रदेश में गतवर्ष उदयपुर के एक विद्यालय में छात्र को चाकू मारने की घटना के बाद शिक्षा विभाग कुछ दिन तो अलर्ट मोड में रहा। घटना के बाद शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में विद्यार्थियों को लेकर प्रदेशभर के राजकीय व निजी विद्यालयों के संस्था प्रधानों को गाइडलाइन जारी […]
- स्कूली छात्रों का हथियार रखना चिंताजनक
झालावाड़.प्रदेश में गतवर्ष उदयपुर के एक विद्यालय में छात्र को चाकू मारने की घटना के बाद शिक्षा विभाग कुछ दिन तो अलर्ट मोड में रहा। घटना के बाद शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में विद्यार्थियों को लेकर प्रदेशभर के राजकीय व निजी विद्यालयों के संस्था प्रधानों को गाइडलाइन जारी की थी। जिसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने स्कूलों में धारधार हथियार व चाकू-कैंची आदि लाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई थी, लेकिन अधिकारियों व संस्थाप्रधानों द्वारा गाइड लाइन की पालना नहीं करने से स्कूली छात्र बैग में चाकू लेकर आ रहे है तो कई छात्र हाथ में कड़े पहनकर स्कूल पहुंच रहे हैं। शहर में मंगलवार को हुई घटना में आठवीं कक्षा के दो छात्रों ने नवीं कक्षा के दो छात्रों के चाकू व हाथ के कड़े से सिर में मारी इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए है। बावजूद इसके शिक्षा अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र हाथ में कड़े पहनकर स्कूल पहुंच रहे हैं।
उदयपुर में अगस्त २०२४ में एक स्कूली छात्रों को चाकू मारने से उसकी मौत हो गई थी। उसके बाद शिक्षा निदेशक ने सख्ती दिखाते हुए आदेश जारी किए थे। जिसमें बताया कि स्कूलों में विद्यार्थी धारदार हथियार, चाकू, कैंची, छुरी सहित किसी भी तरह की नुकीली वस्तुएं साथ लेकर नहीं आ सकेंगे। वहीं, स्कूलों में इस संबंध में शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों को गाइड करने के साथ ही उनके स्कूल बैग की जांच भी करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद किसी विद्यार्थी की ओर से लापरवाही बरतने पर उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
निदेशक के अनुसार अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में पढऩे के लिए भेजते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए स्कूल सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। नई गाइडलाइन को लेकर स्कूल के नोटिस बोर्ड पर सूचना चस्पा करने के साथ ही शिक्षक प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को लगातार इसके बारे में बताएंगे। ताकि, प्रदेशभर के स्कूलों में किसी भी तरह से होने वाले हिंसक घटनाक्रम को रोका जा सके।
राजस्थान के सभी स्कूलों में शिक्षकों के साथ-साथ घर पर अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को ऐसी वस्तुओं के खतरों के बारे में जागरूक करें। अभिभावक अपने बच्चों के बैग की नियमित जांच करने के साथ ही उनके व्यवहार में परिवर्तन दिखने पर सजग रहते हुए शिक्षकों से संपर्क बनाए रखें। स्कूल में यदि कोई विद्यार्थी धारदार हथियार या नुकीली वस्तु लेकर आए तो संस्था प्रधान तुरंत उसके अभिभावक के संपर्क कर अवगत करवाएं। आवश्यकता पडऩे पर उल्लंघन करने वाले विद्यार्थी के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
ऐसे विषय पर अध्यापक-अभिभावक परिषद की बैठक में चर्चा भी की जाएगी। निदेशक ने आदेश में कहा कि शिक्षक रेण्डमली विद्यार्थियों के बैग, डेस्क और व्यक्तिगत वस्तुओं की नियमित जांच करें। साथ ही विद्यार्थियों में अचानक होने वाले व्यवहारगत परिवर्तन पर भी नजर रखते हुए ऐसे विद्यार्थियों के प्रति अतिरिक्त सावधानी रखते हुए संवेदनशील रहें।
बुधवार को स्कूली छात्रों के बीच हुई चाकूबाजी में दोनों छात्रों को डिटेन कर लिया है। घटना के बाद २४ घंटे में १० मामले आम्र्स एक्ट में दर्ज हुए है। स्कूलों में इस तरह की घटनाओं के बारे में रोक लगाने के लिए स्कूल प्रशासन को चैकिंग करना चाहिए। फिर भी हमने चौराहों पर रैंडमली चैकिंग के लिए अभियान चला रखा है। चैन आदि में छोटा चाकू रखना भी गलत है।
बिलकुल सही है, आदेश की पालना करवाएंगे। कल ही दुबारा एक आदेश निकाल कर सभी संस्थाप्रधानों को भेजेंगे। कोई भी छात्र स्कूल बैग में चाकू-कैंची ला रहा तो लगत है। सभी संस्थाप्रधानों को इसकी पालना के लिए पाबंद करेंगे।