झालावाड़

किसान 3 से 4 रुपए किलो बेच रहे प्याज, लागत नहीं निकलने से खेतों में फेंक रहे

तेज गर्मी में अधिक तापमान से ढेर में नीचे दबे प्याज खराब होने लगे हैं। छटनी के बाद खराब हुए नए प्याज को एक तरफ निकाल मजबूरन गांव से बाहर रेवड़ी में फेंकने पड़ रहे हैं

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किसान 3 से 4 रुपए किलो बेच रहे प्याज, लागत नहीं निकलने से खेतों में फेंक रहे

झालावाड़ भालता. राजस्थान के किसानों के लिए प्याज की खेती आफत बन गई। किसानों का मंडी में ले जाने का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है। इससे परेशान किसान खेतों में ही प्याज को फेंकने को मजबूत हो रहे हैं। किसानों का कहना कि मंडियों में 3 से 4 रुपए किलो में प्याज बिक रहा है, जबकि लागत ज्यादा आ रही है। पिछले दिनों बेमौसम बारिश से प्याज खराब होने लग गए हैं।

पश्चिमी विक्षोभ उठने से गत दिनों हुई बूंदाबांदी व हवा चलने के बाद गर्मी के फिर तेवर तेज हो गए। भीषण गर्मी के दौर से प्याज की फसल खराब होने की स्थिति में आने लगी है। तपिश के कारण कुछ दिन पहले जमीन से निकाले प्याज सडऩे लगे हैंं।

अच्छे भावों का इंतजार
खेतों में उपजे प्याज, अब खलिहानों व घरों में क्षेत्र के सूरी, उमरिया, रांकडा, बावड़ीखेड़ा, पाटलीखेड़ा सहित कई गांवों के किसानों ने प्याज की फसल बुआई कर किस्मत आजमाई। प्याज की फसल तैयार हुए करीब महीनाभर हो चुका, लेकिन बाजार व मंडियों में मांग अभी तक नहीं निकली। दिसंबर और जनवरी महीने में खेत में प्याज लगाने के बाद बीच में इसमें थ्रिप्स कीट रोग लग गया। जिससे प्याज अपने आप पीली पड़कर सूखने लगी। कीट से बचाने किसानों ने बाजार से हजारों रुपए की महंगी कीटनाशक दवा लाकर छिड़काव किया, फिर भी कई किसानों की प्याज बच नहीं पाई। वहीं जितने किसानों की फसल ठीक स्थिति में थी, उनमें से कई ने खेत से प्याज की खुदाई कर ली, जबकि कई का काम चल रहा है। अब अच्छे भावों के इंतजार में किसी ने खलिहान में तो किसी ने घरों में फैला रखा है। किसान प्याज को बेचना तो चाह रहे हैं, लेकिन मंडियों में भाव नहीं होने से संभव नहीं हो रहा है।

रुपयों की जरूरत मगर भाव कम
फसल तैयार करने के बाद बेचकर अपने खर्चों की पूर्ति की जाती है, देनदारियां चुकाई जाती हैं। वर्तमान में प्याज के खरीदार भी नहीं आ रहे हैं। किसानों को पैसों की जरूरत होने के बाद भी अपेक्षा से कम भाव मिलने के कारण फसल स्टॉक करना मंजूर कर रहे हैं। वर्तमान भावों में मुनाफा मिलना तो दूर उल्टा घाटा लगता नजर आने से किसान बेचवाली से कतरा रहे हैं।

Published on:
29 May 2022 08:37 am
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