झालावाड़

पांच करोड़ से चमकते व दमकते गढ़ संग्रहालय को लोकार्पण का इंतजार…

-रियासतकालीन विरासत से हो सकेगें रुबरु-हेरिटेज लुक से सजेगी धरोहर -लोकार्पण का इंतजार, तैयारियां जोरो पर
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Five million lit and gloomy museum awaiting the launch ...
पांच करोड़ से चमकते व दमकते गढ़ संग्रहालय को लोकार्पण का इंतजार...

पांच करोड़ से चमकते व दमकते गढ़ संग्रहालय को लोकार्पण का इंतजार...
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. शहर का हद्य स्थल ऐतिहासिक गढ़ भवन अब शीघ्र ही हेरिटेज लुक से सजा पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। इन दिनो पांच करोड़ की लागत से इसका सौंदर्यकरण किया जा रहा है। बस इंतजार है इसके लोकार्पण का। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से यहां राजकीय संग्रहालय संचालित किया जाएगा। वर्तमान में संग्रहालय में कुछ विशेष आकर्षण सामग्री के तहत डोम बनाया गया है इसमें जिले के एतिहासिक स्थलों की चित्रमय झांकी सजी है। इसमें कोल्वी, सूर्य मंदिर, गागरोन व अन्य ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थलों के चित्र सजे है। गढ़ भवन संग्रहालय में प्रवेश के लिए टिकट घर बनाया गया है यहां से टिकट लेकर पर्यटक मुख्य कांच के द्वार से अंदर प्रवेश करेगा। इसके ठीक बाद विभाग की ओर से स्वागत कक्ष है। इसके बाद बाई ओर से घुमने का रास्ता शुरु होगा। संग्रहालय में करीब कम से कम दो घंटे विभिन्न अवलोकन के बाद दूसरे रास्ते से पर्यटक स्वागत कक्ष तक पहुंच पाएगा। ऐसी विभाग की ओर से व्यवस्था की गई है। बीच में कई जगह बैठने व आराम करने के लिए भी सुविधा होगी।
-इन दीर्घा में निहार सकेगें अनमोल धरोहरें
गढ़ भवन संग्रहालय में पहले मात्र पांच दीर्घा थी लेकिन अब पर्याप्त जगह मिलने पर इनकी संख्या 15 हो गई है। इसमें बौद्व दीर्घा, जैन दीर्घा, चैत्य दीर्घा, देवी दीर्घा, मंदिर स्थापत्य दीर्घा, दीस्पाल दीर्घा, शिव दीर्घा, सूर्य दीर्घा, वैष्णव दीर्घा, लघु चित्र दीर्घा, हथियार दीर्घा, वस्त्र दीर्घा, भित्ती चित्र दीर्घा व विविध दीर्घा बनाई गई है इसमें पर्यटक अपनी रुचि के अनुसार दीर्घा का विस्तार से अवलोकन कर सकेगें। रात्री मेंं गढ़ भवन की आभा बिखेरने के लिए करीब 200 अप व ट्रेक लाईट्स लगाई गई है।
-यह है संग्रहालय की विशेषता
रियासतकाल में झालावाड़ के शासक भवानी सिंह द्वारा हाड़ौती में 1 जून 1915 को प्रथम पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना की। यहां कलाकृतियों, मूर्तियों, अभिलेखों, हस्तिलिखित व चित्रित ग्रंथो का अदभुत भंडार है। यहां संग्रहित अद्ध्र्रनारिश्वर की अद्वितीय मृर्ति का शिल्प सौंदर्य इतना सुंदर है कि इसे लंदन में आयेाजित भारतीय मूर्तिकला खंड़ में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था। यहां सन् 1869 की वर्तमान महाराजराणा जालिम सिंह द्वितीय की हाई व्हीलर की साईकल भी दुर्लभ व दर्शनीय है। इसके अलावा संग्रहालय में बहुत कुछ देखने योग्य सामग्री है।
-यह है इतिहास, 14 साल में बना था गढ़
इतिहासकार ललित शर्मा ने बताया कि 1838 में जब झालावाड़ राज्य की स्थापना हुई तब झाला जालिम सिंह के पोत्र झाला मदन सिंह को यह राज्य मिला। उन्होने ब्रिटिश सरकार से छावनी में स्वयं के शाही निवास के लिए गढ़ भवन निर्माण की स्वीकृति ली व प्रथम शासक झाला मदन सिंह के समय 1840 में गढ़ भवन का निर्माण आरम्भ हुआ था उन्होने 1840 तक इसका कार्य करवाया बाद में उनके पुत्र पृथ्वी सिंह शासक बने उनके काल 1854 के आसपास गढ़ भवन पूरा बन सका।
-मुख्य द्वार व शीश महल रहा बैनूर
गढ़ भवन का मुख्य नक्कार खाना द्वार पूरी तरह उपेक्षित होकर गंदगी व कचरे से अटा पड़ा है। जबकि गढ़ भवन में ठीक सामने से बड़ा बाजार की ओर से प्रवेश करने पर सबसे पहले नक्कारखाना द्वार से ही अंदर जाना पड़ता है लेकिन इस विशाल व भव्य द्वार को सहजने व संवारने की ओर ध्यान नही दिया जा रहा है। इसी प्रकार गणेश मंदिर के पीछे स्थित जनानी ड्योढ़ी के महलों को भी उपेक्षित छोड़ रखा है। यहां स्थित रियासतकालीन भव्य शीश महल की हालत खराब है। उसको भी संरक्षण की दरकार है। इसी प्रकार गढ़ भवन के मंगलपुरा व विलायती दरवाजों के भी जीर्णोद्वार की आवश्यकता है वर्ना गढ़ भवन के सौदर्य के बीच यह मखमल में टाट के पैबंद की तरह नजर आएगें।
-गढ़ को संवार कर संग्रहालय की पूरी तैयारी चल रही है
इस सम्बंध में राजकीय पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के संग्रहालयध्यक्ष महेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग ओर से गढ़ भवन का पांच करोड़ की लागत से जीर्णोद्वार व सौंदर्यकरण कर संग्रहालय का काम करीब पूरा होने को है। लोकार्पण की भी पूरी तैयारी है। मुख्य द्वार व अन्य कार्य बाद में चलते रहेगें।

Published on:
06 Oct 2018 11:19 am