झालावाड़

बिना गुरु कैसे बढ़ेंगे विद्यार्थियों के कदम

-जिलेभर के 1658 स्कूलों में 2947 शिक्षकों के पद खाली- कैसे होगी शिक्षा की नींव मजबूत

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बिना गुरु कैसे बढ़ेंगे विद्यार्थियों के कदम

अरुण त्रिपाठी

झालावाड़.प्रदेशभर में राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के बढ़ते कदम योजना लागू की जा रही है। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं। भारी भरकम बजट भी जारी किया जा रहा है।
लेकिन जिले के हालात इसके उलट हैं। यहां मुख्यालय पर ही आला अधिकारियों के पद खाली है,जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, डाइट प्राचार्य और एडीपीसी समसा के पद खाली हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में सरकार की योजना कितनी कारगर साबित होगी। अब बात ब्लॉक की जाए तो, जिले के 8 ब्लॉक में से 6 में सीबीईओ मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद अकलेरा, मनोहरथाना, झालरापाटन, सुनेल, भवानीमंडी और डग में खाली हैं। इनमें से बकानी और खानपुर में ही सीबीईओ के पद भरे हैं। इनमें भी खानपुर के सीबीईओ की 2 माह बाद सेवानिवृत्ति होने वाली है।
मनोहरथाना ब्लॉक के 33 प्रिसिंपल के पद स्वीकृत है जिनमें से मात्र चार में ही कार्यरत हैं। उनमें से भी एक दांगीपुरा के वीरेंद्र सिंह के पास सीबीईओ का अतिरिक्त कार्यभार है। ये तो बानगी मात्र है, पूरे जिले में अधिकांश विद्यालयों में प्रधानाचार्य, व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक, तृतीय श्रेणी अध्यापकों,शारीरिक शिक्षक, लैब असिस्टेंट और कम्प्यूटर इंचार्ज आदि के पद खाली है। ऐसे में कैसे जिले में शिक्षा की नींव मजबूत होगी।

अतिरिक्त कार्यभार,मूल काम प्रभावित-

जिले में शिक्षा विभाग में कई कार्यालयों में अतिरिक्त कार्यभार से काम चलाना पड़ रहा है। जिसमें अकलेरा में एसीबीईओ के पास सीबीईओ का चार्ज होने से एसीबीईओ का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सभी जगह 2-2 एसीबीईओ के पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में एक-एक ही काम कर रहे हैं। वहीं खानपुर और मनोहरथाना में तो ऐसीबीईओ का भी पद भी कई दिनों से खाली चल रहा। वहीं एक सीनियर विद्यालय तो ऐसा है जहां तृतीय श्रेणी अध्यापक प्रबोधक के पास पीईईओ का कार्यभार है, जो नियम के विरूद्ध। इन सबके बीच करीब दो दर्जन अध्यापकों ने घरों के पास प्रतिनियुक्तियां करवा रखी हैं। जबकि जिले में शिक्षकों की भारी कमी है, ऐसे में जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है वहां अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है।

जाने वाले ज्यादा, आ कोई नहीं रहा-
शिक्षा विभाग में अभी तक स्थानांतरण की जितनी भी सूचियां आई हैं। उनमें जिले से बाहर जाने वाले शिक्षकों की संख्या बहुत ज्यादा है,जबकि जिले में आने वालों की संख्या गिनती की है। ऐसे में पूरे जिले को शिक्षा अधिकारियों व शिक्षकों की कमी से जूझना पड़ रहा।

जिले में इतने पद खाली
ब्लॉक विद्यालय स्वी.पद कार्यरत रिक्त
अकलेरा 259 1515 1163 352
बकानी 154 1007 750 257
भवानीमंडी 186 1417 1080 337
डग 218 1629 1083 546
झालरापाटन 212 1685 1387 298
खानपुर 190 1488 1225 263
मनोहरथाना 225 1503 1080 423
सुनेल 214 1743 1272 471
कुल 1658 11987 9040 2947

शिक्षकों की कमी को लेकर यहां हो चुके प्रदर्शन-

केस एक-
जिले में 2 सितंबर को राउमावि पिपलिया खुर्द और राउमावि जगदीशपुरा में स्टाफ को लेकर तालाबंदी हो चुकी है, लंबे समय तक अभिभावक व बच्चे धरने पर बैठे रहे इसके बाद सीबीईओ ने दोनों स्कूलों में तीन-तीन शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की।

केस दो-
3 सितम्बर को मनोहरथाना के राउमाविबा की बालिकाओं ने शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, इसके बाद ज्ञापन दिया, आश्वासन के बाद बालिकाएं मानी।

केस दो-
6 सितम्बर को सुनेल के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में व्याख्याताओं एवं शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर छात्रों ने विद्यालय से ढ़ोल के साथ विरोध रैली निकाली।

केस चार-
जिले में 13 व 14 सितम्बर को चौमहला उपखण्ड के राउमावि कचनारा में ग्रामीणों ने स्वीकृत 26 में मात्र 7 ही शिक्षक होने व शेष पद खाली होने से ग्रामीणों ने नाराज होकर तालाबंदी की थी। ये सितंबर के प्रदर्शन इससे पूर्व भी जिले में अभिभावक व छात्र शिक्षकों की कमी को लेकर कई बार विद्यालय प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जता चुके हैं।

विद्या संबल से कर रहे कमी पूरी-
जिले में मनोहरथाना और डग क्षेत्र ऐसे हैं। जहां शिक्षकों की कमी है। राज्य सरकार की विद्या संबल योजना के तहत प्रधानाचार्य स्तर पर प्रशिक्षित अध्यापकों को एक माह में 90 घंटे तक लगाए जा रहे हैं, पूरे जिले में 600 से अधिक अस्थाई शिक्षकों की नियुक्ति प्रधानाचार्यों द्वारा की गई है। शिक्षकों की कमी की सूचना राज्य सरकार को भेज दी है।
हरि शंकर शर्मा, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी।

Published on:
21 Sept 2022 09:15 pm
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