झालावाड़

सुधार की कवायद: रोडवेज के हालात जानेंगे इंजीनियर डीजल खपत कम करने पर जोर

.राजस्थान रोडवेज में पुराने बेड़े के कारण बढ़ते घाटे को कम करने की कवायद शुरु की गई है। जिसके तहत सड़क पर धुंए का गुबार, कटी-फटी सीट और बीच रास्ते में आए दिन ब्रेक डाउन होने वाले रोडवेज के वाहनों के हालात जल्द सुधारे जाएंगे।
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Updated: 1 Apr 2024, 11:23 AM IST
Improvement exercise: Engineers will know the condition of roadways, emphasis on reducing diesel consumption.
सुधार की कवायद: रोडवेज के हालात जानेंगे इंजीनियर डीजल खपत कम करने पर जोर

.राजस्थान रोडवेज में पुराने बेड़े के कारण बढ़ते घाटे को कम करने की कवायद शुरु की गई है। जिसके तहत सड़क पर धुंए का गुबार, कटी-फटी सीट और बीच रास्ते में आए दिन ब्रेक डाउन होने वाले रोडवेज के वाहनों के हालात जल्द सुधारे जाएंगे। साथ ही वर्कशॉप में बेतरतीबी से बिखरे सामान सहित साफ-सफाई करवाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश के सभी डिपों में वर्कशॉप का जोनल इंजीनियर की ओर से निरीक्षण किया जाएगा। अच्छी बात है कि निरीक्षण की रिपोर्ट जोनल इंजीनियर की ओर से तीन दिन में मुख्यालय भेजी जाएगी। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ये होंगे काम- निगम के कार्यकारी निदेशक यांत्रिक रवि सोनी ने सभी डिपो में निरीक्षण का शिड्यूल जारी कर दिया है। निरीक्षण के दौरान कम डीजल औसत देने वाले वाहनों की मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही सभी बसों में कूलेंट, फेनबेल्ट, सहित रबर पार्टस को बदला जाएगा। जिससे न केवल रोडवेज संचालन की लागत कम होगी वहीं वातावरण में फैलने वाले प्रदूषण से कुछ हद तक निजात मिलेगी और यात्रियों को बहेतर सुविधाएं दी जाएगी। ये है उद्देश्य- रोडवेज मुख्यालय द्वारा रोडवेज डिपो के जोनल इंजीनियर की टीम द्वारा निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य डिपो की बसों के हालात सुधार कर बसों में हो रही डीजल की अधिक खपत को कम करना तथा। अधिक पुरानी बसों का निरीक्षण बाद कंडम घोषित करना है। टीम में दो लोग शामिल होंगे जो डीपो स्तर पर बसों की मरम्मत सहित कई तरह के सुझाव देंगे। ताकि पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सके।

फैक्ट फाइल- -

झालावाड़ डिपो में पुरानी बसे -20

- एक दर्जन बसे 8 लाख किमी से अधिक चल चुकी है

- रोडवेज में नई बसें- 17 - रोडवेज में अनुबंधित बसे- 15

कम करना है खपत-

रोडवेज मुख्यालय की ओर से हर माह प्रत्येक डिपो को प्रत्येक वाहन का प्रति किलोमीटर एवरेज का लक्ष्य दिया जाता है। इस लक्ष्य के प्राप्त करना जरूरी होता है। हकीकत यह है कि रोडवेज का अधिकांश बेडा पुराना हो चुका है और निर्धारित किलोमीटर के बाद भी बसों को चलाया जा रहा है। जिससे डीजल की खपत बढ़ती जा रही है। इससे रोडवेज में यात्री भार गिरता जा रहा है। रही सही कसर स्टॉफ की कमी के कारण हो गई है।ऐसे में सभी परेशानियों को जानकार उनका समाधान टीम द्वारा किया जाएगा।

टीम करेगी निरीक्षण-

रोडवेज डिपो की बसों में डीजल की बचत सहित बसों में अन्य काम करवाने व पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए जोनल इंजीनियर की टीम डीपो का निरीक्षण करेगी। इसके निर्देश आ चुके हैं। इससे रोडवेज की वर्कशॉव व बसों में जो कमियां है उन्हे दूर करने का प्रयास किया जाएगा। प्रतीक मीणा, मैनेजर संचालन, राजस्थान रोडवेज डिपो, झालावाड़।

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