झालावाड़

ज्येष्ठ अमावस्या 6 जून को, पूजन और दान से मिलेगा आर्शीर्वाद

ज्येष्ठ अमावस्या 6 जून को, पूजन और दान से मिलेगा आर्शीर्वाद

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  • सुनेल. सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का आर्शीर्वाद पाने के लिए खास माना जाता है। यूं तो हर महीने में अमावस्या तिथि होती है, लेकिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि विशेष मानी जाती है। इस बार 6 जून गुरुवार को ज्येष्ठ अमावस्या है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों की पूजा और उनके निमित कुछ खास चीजों का दान करने से न सिर्फ पितर प्रसन्न होते हैं बल्कि पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाता है।

सुनेल. सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का आर्शीर्वाद पाने के लिए खास माना जाता है। यूं तो हर महीने में अमावस्या तिथि होती है, लेकिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि विशेष मानी जाती है। इस बार 6 जून गुरुवार को ज्येष्ठ अमावस्या है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों की पूजा और उनके निमित कुछ खास चीजों का दान करने से न सिर्फ पितर प्रसन्न होते हैं बल्कि पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र कुमार जोशी ने बताया कि इस दिन गंगा में स्नान के साथ हाथ में काला तिल लेकर अपने पितरों को याद करके उन्हें जल अपूर्ण करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होते हैं।

पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं जल

ज्योतिषाचार्य पंडित जोशी के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ में भी एक लोटा जल जरुर देना चाहिए। पीपल के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु विराजते है। इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या पर उन्हें जल देने से पितरों का आर्शीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा ज्येष्ठ अमावस्या के दिन गरीब, जरुरमंद और भूखे व्यक्ति को भोजन भी जरुरर कराना चाहिए। इससे भी पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जब पितर प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख समृद्वि का वास होता है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शाम के समय कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाना चाहिए और फिर जलते हुए कपूर को छत के मध्य में जलते हुए छोड़ देना चाहिए। फिर उसे वापस लौट कर नहीं देखना चाहिए, इससे भी नेगेटिव ऊर्जा समाप्त होती है।

ज्येष्ठ अमावस्या क्यों है खास

धर्म ग्रंथों में ज्येष्ठ अमावस्या को शनि देव की जन्म तिथि कहा गया है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए ज्येष्ठ अमावस्या खास मानी जाती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़े साती और ढैय्या चल रही है वे इस दिन शनि देव का तेल से अभिषेक कर काली चीजों जैसे काले तिल, काले रंग के वस्त्र, जूते, चप्पल, काला छाता, काले चने, सरसों का तेल आदि का दान करें इससे शनि के दुष्प्रभाव कम होते हैं। ज्येष्ठ अमावस्या का दिन सुहागिनों के लिए भी बहुत खास है। इस दिन माता सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस ले आई थीं, तभी से ज्येष्ठ अमावस्या पर शिव-पार्वती, बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। बरगद में त्रिदेव का वास माना गया है, इनकी उपासना से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।

ज्येष्ठ अमावस्या का मुहूर्त

  • पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या 5 जून 2024 को रात 07 बजकर 54 मिनट से शुरु होकर 6 जून 2024 को शाम 06 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 04.02 से सुबह 07.07 तक रहेगा। पितृ पूजन सुबह 11.30 से दोपहर 02.04 तक किया जा सकता है। शनि देव पूजा शाम 06.00 से रात 09.49 तक होगी। शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद श्रेष्ठ मानी गई है।
Published on:
01 Jun 2024 08:16 pm
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