Luv-Kush Vatika is attracting tourists in Badbela.
झालावाड. झालावाड़ जिला वन क्षेत्र की दृष्टि से राजस्थान में प्रथम पांच जिलों में अपना स्थान रखता है। यहां मानसून के दौरान पहाड़ी एवं वन क्षेत्र में फैली हरियाली बाहर से आने वाले लोगों को आकर्षित करती है। जिला प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
जिले में वन विभाग द्वारा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर असनावर क्षेत्र में बड़बेला तालाब के पास लव-कुश वाटिका का निर्माण किया गया है। जिसका लोकार्पण पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने वन महोत्सव के दौरान किया। लव-कुश वाटिका वन सम्पदा एवं जल संरचना को सुरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को वन एवं पर्यावरण से रूबरू करवाते हुए मानव जीवन में इनके महत्व को प्रतिपादित करने वाला इको ट्यूरिज्म क्षेत्र है। लव-कुश वाटिका का मुख्य उद्देश्य पक्षियों एवं वन्यजीवों के संरक्षणके लिए आमजन को जागरूक कर उनकी सहभागिता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों के मनोरंजन के साथ-साथ वन्य जीव तथा पर्यावरण प्रेमियों, पक्षीविदों एवं शोधार्थियों के लिए शोध स्थल के रूप में विकसित करना है।
लव-कुश वाटिका की इकाइयां
लव-कुश वाटिका में इन्टरप्रिटिशन सेन्टर, बर्ड वॉचिंग पॉइन्ट, सनसेट पॉइन्ट, पर्यावरण गैलेरी, इको-ट्रोल, किड्स प्ले-जोन, वेटलेण्डबड़बेला तालाब, सेल्फी पॉइन्ट, पौधशाला, भूल-भुलैया तथा वृहद एवं लघु भ्रमण पथ आमजन के देखने योग्य हैं। इनमें से पर्यावरण गैलेरी के माध्यम से आने वाले पर्यटक पक्षियों, वन्यजीवों एवं वनस्पतियों के बारे में छाया चित्रों एवं लघु फिल्म के द्वारा जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वहीं पौधशाला के माध्यम से बीज से पौधे तैयार होने तक की कार्यविधि से अवगत होकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे निर्धारित दर से प्राप्त कर सकेंगे।
महत्वपूर्ण वाटिकाएं
लव-कुश वाटिका में बेटी वाटिका, त्रिफला कुंज, वनमहोत्सव वाटिका, तीर्थंकर वाटिका, राशि वाटिका, नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका, पंचवटी वाटिका, हाड़ौती वाटिका, औषध वाटिका, अशोक वाटिका, फल वाटिका एवं मियांवाकी स्थित है।
लव-कुश वाटिका में पाए जाने वाले जलीय पक्षी