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राजस्थान पुलिस बेडे़ में नारी शक्ति की भागीदारी दस फीसदी के पार

महिलाएं कर रही कानूनी काम सहित वीआईपी डयूटी

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हरि सिंह गुर्जर

एक्सक्लूसिव

झालावाड़ राजस्थान पुलिस में महिलाओं की भूमिका बीते एक दशक में निर्णायक रूप से बदली है। जहां पहले पुलिस बल में महिला कार्मिकों की भागीदारी महज 2 प्रतिशत तक सीमित थी। जो अब यह बढ़कर करीब 10 प्रतिशत हो चुकी है। प्रदेश में पुलिस में आ रहे इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर झालावाड़ जिले में भी देखने को मिल रही है। जहां महिला पुलिसकर्मी फील्ड ड्यूटी, रात्रि गश्त, नाकाबंदी और कानून-व्यवस्था के साथ मुकदमों की जांच की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही है। जिले में जहां महिलाओं की संख्या पहले बहुत कम हुआ करती थी, वहीं अब 156 महिला कांस्टेबल है।

फील्ड में मजबूत मौजूदगी-


झालावाड़ जिले में महिला सिपाही से लेकर निरीक्षक स्तर तक की अधिकारी पुलिस थानों या महिला डेस्क तक सीमित नहीं हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई पुलिस थानों में महिला कांस्टेबल काम कर रही है। हवलदार से लेकर एसआइ स्तर की महिलाएं गंभीर अपराधों के मामलों की जांच कर रही है। फील्ड में भी रात के समय गश्त करने, सघन चेकिंग, वीआइपी सुरक्षा जिम्मेदारी और संवेदनशील कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में तैनाती की जा रही है।

प्रशिक्षण में बराबरी, ड्यूटी में समान अवसर-

राजस्थान पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में महिला कर्मियों को हथियार संचालन, ड्राइविंग, फील्ड और कानूनी प्रक्रियाओं का वही प्रशिक्षण दिया जा रहा है जो पुरुष कर्मियों को मिलता है। प्रशिक्षित होने के बाद जैसे ही पोस्टिंग पर जाती है महिला कार्मिकों को ड्यूटी में भी समान अवसर मिलता है।


प्रदेश में 10 प्रतिशत भागीदारी-


राजस्थान पुलिस का प्रदेश में कार्यरत जाब्ता करीब एक लाख दस हजार है। इसमें सक्रिय ड्यूटी और फील्ड में जिम्मेदारी संभालने में करीब एक लाख कार्मिक रहते है। इनमें महिला पुलिस कर्मियों की संख्या करीब 10,000 है। हालांकि अभी महिलाओं की तादाद दस फीसदी के पास पहुंची है। परन्तु नई भर्तियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से आगामी सालों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी। हाल ही में 10 हजार पदों की भर्ती में 3303 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।

प्रमुख ड्यूटी क्षेत्र

  • रात्रि गश्त
  • नाकाबंदी व सघन चेकिंग
  • वीआईपी सुरक्षा
  • कानून व्यवस्था संधारण

-प्रशिक्षण: हथियार, ड्राइविंग, फील्ड टेक्टिस, कानूनी प्रक्रिया आदि में।


झालावाड़ : आंकड़े एक नजर में

  • पुलिस टै्निंग सेंटर में अभी कोटा रेंज की 50 एएसआई पीटीएस में प्रशिक्षण ले रही।
  • जिले में निर्भया सक्वायड में - 8 महिला कांस्टेबल ड्यूटी कर रही।
  • जिले में कालिका यूनिट में- 8 महिला कांस्टेबल ड्यूटी कर रही।
  • जिले में कुल महिला कांस्टेबल-156

मुझे पुलिस में डयूटी करते हुए साढ़े तीन साल हो गए है। अब थानों में महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट आदि की सुविधाएं है। हम कानून व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी, संतरी प्रेहरा आदि की ड्यूटी आसानी से करते हैं। कोई पीडित महिलाएं आती है तो उनकी भी समझाईश करते हैं।


रजनी कुमारी, महिला कांस्टेबल, बकानी।

अभी मैं जयपुर से प्रशिक्षण लेकर आई हूं, यहां आमद-रवानगी डालने सहित अन्य काम सीख रहे हैं। कम्प्यूटर पर रिपोर्ट चढ़ाना, बाहर ड्यूटी पर जाना व कोई परिवाद आता है तो उसके बारे में जानकारी ले रहे हैं। अब पुलिस में महिलाओं की संख्या पहले की बजाई बढ़ी है। प्रशिक्षण में हथियार चलाना भी सीखा है।


इन्द्रा दायल, महिला कांस्टेबल, बकानी।

जिले में पहले 91 महिला कांस्टेबल थी, अब 156 हो गई है, महिला कांस्टेबल के लिए सभी थानों में अलग से टॉयलेट व विश्राम गृह की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हे सम्मान मिलने से पुलिसिंग भी मजबूत हुई है। जिले में महिला कांस्टेबल कानून व्यवस्था वीआईपी ड्यूटी आदि में पूरी भागीदारी निभा रही है। आने वाली भर्ती में इनकी संख्या और बढ़ जाएगी। शहर में कालिका यूनिट ने पिछले साल 40 मनचलों को पकड़ा है।


अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक, झालावाड़।


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