झालावाड़

Jhalawar: जिसे बनना था मां की आंखों की रोशनी और पिता की आवाज, वही चला गया; कुएं में मिला इकलौते बेटे का शव

झालावाड़ जिले में झालरापाटन क्षेत्र के तीतरवासा गांव में एक दुखद घटना सामने आई है। दिव्यांग माता-पिता के 7 वर्षीय इकलौते बेटे लोकेश का शव गांव के एक कुएं में मिला। लोकेश की मां देख नहीं सकतीं और पिता बोल नहीं सकते। मंगलवार शाम स्कूल से लौटने के बाद अचानक लापता हुए मासूम के कपड़े कुएं के पास मिले थे। रात में अंधेरे के कारण तलाशी रोकनी पड़ी, लेकिन बुधवार सुबह पुलिस और ग्रामीणों ने कुएं से शव बरामद कर लिया।
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Oct 01, 2026
child of disabled parents found dead in well
मृतक बालक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाते हुए (पत्रिका फोटो)

झालरापाटन (झालावाड़): वह मां की आंखों की रोशनी था…पिता की खामोशी में उनके जीवन की आवाज था। मां दुनिया देख नहीं सकती और पिता बोल नहीं सकते। ऐसे में सात साल का लोकेश ही दोनों की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा था। उसकी आवाज, उसकी चहचहाहट और घर में उसकी मौजूदगी ही इस परिवार की छोटी-सी दुनिया थी। लेकिन मंगलवार शाम अचानक लोकेश लापता हो गया। बुधवार सुबह जब उसका शव कुएं से मिला तो परिवार की वह दुनिया हमेशा के लिए सूनी हो गई।

तीतरवासा गांव निवासी भूपेंद्र कुमार कंजर का 7 वर्षीय बेटा लोकेश मंगलवार को झालरापाटन के निजी स्कूल से पढ़कर घर लौटा था। कुछ देर बाद वह अपनी मां सुमित्रा के साथ खेत पर चला गया। सुमित्रा खेत में सोयाबीन काटने में व्यस्त हो गई। शाम को जब दोनों घर लौट रहे थे तो मां ने लोकेश को आवाज लगाई, लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

खुद दुनिया नहीं देख सकती थी, फिर भी बेटे को आवाज देकर तलाशती रही मां

सुमित्रा खुद देख नहीं सकतीं, लेकिन मां का दिल शायद किसी अनहोनी को महसूस कर चुका था। उन्होंने बार-बार लोकेश को आवाज लगाई। आवाज के जवाब में बेटे की कोई आहट नहीं मिली तो वह घर पहुंचीं और पति भूपेंद्र को इसकी जानकारी दी।

भूपेंद्र बोल नहीं सकते, लेकिन बेटे के लापता होने का दर्द वह समझ रहे थे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकेश की तलाश शुरू कर दी। देर शाम भंवरलाल के कुएं के पास लोकेश के कपड़े मिले तो परिवार और ग्रामीणों की चिंता गहरा गई। अनहोनी की आशंका के बीच पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस और ग्रामीणों ने रात में ही कुएं में तलाश शुरू की, लेकिन अंधेरा बढ़ने के कारण अभियान रोकना पड़ा। बुधवार सुबह एक बार फिर कुएं में तलाश शुरू की गई। कुछ देर बाद गहरे पानी में लोकेश का शव मिल गया। पुलिस ने शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाया है। लोकेश कुएं में किन परिस्थितियों में गिरा, इसका फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चला है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

जिसे बनना था मां-बाप का सहारा, सात साल में ही छोड़ गया साथ

ग्रामीणों के अनुसार लोकेश अपने दिव्यांग माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता खेती-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। दोनों की आंखों में बेटे को लेकर कई सपने थे। उम्मीद थी कि लोकेश बड़ा होगा, पढ़ेगा और एक दिन उनका सहारा बनेगा। लेकिन जिस बच्चे के कंधों पर भविष्य में माता-पिता का सहारा बनने की उम्मीद थी, वह सात साल की उम्र में ही उनसे हमेशा के लिए दूर चला गया।

बेटे की मौत की खबर मिलते ही माता-पिता बिलख उठे। मां की आंखें भले ही दुनिया को देख नहीं सकतीं, लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनकी सिसकियों में साफ महसूस किया जा सकता था। पिता बोल नहीं सकते, इसलिए उनके पास अपना दुख शब्दों में कहने का रास्ता भी नहीं था। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक लोकेश की आवाज गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। मां की दुनिया की रोशनी और पिता की खामोशी की आवाज बन चुका उनका इकलौता बेटा अब सिर्फ यादों में रह गया है।

Updated on:
01 Oct 2026 12:40 pm
Published on:
01 Oct 2026 12:40 pm