झालावाड़

सात समंदर पार भी महक रही झालरापाटन की फीणी की खुशबू

बढ़ रही मांग

2 min read
सात समंदर पार भी महक रही झालरापाटन की फीणी की खुशबू

झालरापाटन. कोटा की कचोरी, बीकानेर का भुजिया, ब्यावर की तिल पट्टी की तरह झालरापाटन में बनाई जाने वाली फीणी का स्वाद अब पूरे देश के साथ ही विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है और इसकी खुशबू सात समंदर पार भी महकने लगी है। पहले फीणी की मांग सर्दी के मौसम में ही रहती थी, लेकिन अब यह पूरे वर्ष बिकने लगी है और इसने प्रमुख मिठाई का स्थान ले लिया है। बाहर से आने वाले रिश्तेदारों के साथ ही यहां से बाहर जाने वाले अधिकांश लोग यहां की मशहूर फीणी को अपने साथ लेकर जाते है और अब तो हालात यह हो गए है कि बाहर रहने वाले परिवार फोन करके अपने रिश्तेदारों को फीणी भिजवाने की मांग करते हैं। दुबई, अमेरिका व विदेशों में रहने वाले स्थानीय नागरिक यहां से वापस जाते समय उनके परिजनों के साथ ही संबंधी व मित्रों के लिए सौगात के रूप में फीणी लेकर जाते हंै। पहले कुछ ही परिवार इस व्यापार को करते थे। अब दर्जनों परिवार इस काम में जुटे है। पहले एक ही प्रकार की फीणी बनाई जाती थी। अब डालडा घी के अलावा देशी घी, सादी व दूध की फीणी बनाई जाने लगी है। जिसमें फीकी व मीठी दो तरह की फीणी तैयार की जाती है। फीणी तैयार करने का काम परिवार के मुखिया ही करते हैं और कारीगर इन्हें तलने का काम करते हैं। फीणी की मांग अब ग्रामीण क्षेत्र तक भी तेजी से बढ़ रही है।।जिससे फीणी निर्माताओं से आसपास के होटल व्यवसायी होलसेल में फीणी खरीदकर कस्बो व गंावों में बेच रहे हैं। फीणी व्यवसायी गिरधरकुमार बडज़ात्या व मनोहर प्रकाश ने बताया कि उनके यहां पिछली चार पीढिय़ों से यह व्यापार किया जा रहा है। पहले तो सर्दी के मौसम में ही फीणी की मांग रहती थी अब पूरे बरस फीणी बिकती है। गंावों में तो फीणी शादी विवाह में मिठाई के रूप में पत्तल में रखी जाती है।
ऐसे बनाई जाती है फीणी
मेदा में घी मिलाकर फीणी लोए के रूप में तैयार की जाती है। जिसे बाद में कढ़ाई में तला जाता है। जिससे यह बारीक तार के रूप में तैयार होती है। फीणी पर चासनी चढ़ाकर इसे मीठी फीणी के रूप में तैयार करते हैं।

Published on:
11 Dec 2020 10:23 pm
Also Read
View All