झालावाड़

काबुली चना व तारामीरा से लगाव

लहसुन से मोह भंग : दलहन व मसाला फसलों के प्रति रूझान
2 min read
Kambli Chana and Tara Mira Disillusioned with garlic
काबुली चना व तारामीरा से लगाव

रटलाई. कस्बे सहित क्षेत्र में लहसुन के प्रति मोह भंग होने के बाद कई गांवों के किसानों ने इस बार फसलों की अलग हट के बुवाई की है। इसमें काबुली चने, तारामीरा, कलौंजी की फसल बुवाई कर मालामाल होने की उम्मीद की है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में किसानों ने पिछले वर्ष लहसून की फसल की बम्पर पैदावार के बाद भाव अर्श से फर्श पर आ गए थे। इसके बाद कई किसानों ने दलहन व मसाला फसलों के प्रति रूझान दिखाया है। क्षेत्र के लाल्याखेड़ी, पाटलिया कुल्मी में काबूली चना, किशनपुरा, नयागांव बोरखेड़ी के किसानों ने कलौंजी तो रामनिवास दुधालिया व देवरी आदि के किसानों ने तारामीरा इस प्रकार से किसानों ने फसलों के बौने में बदलाव करने से किसानों को इनके अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है। लाल्याखेड़ी के किसान रामनारायण और पाटलियाकुल्मी के कैलाश पाटीदार ने बताया कि काबुली चने की बुवाई कई वर्षों से कर रहे हैं, लेकिन इस वर्ष चने की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद बंधी है। क्षेत्र में किसानों में तारामीरा और कलौंजी के प्रति भी लोगों का भाव के चलते रूझान बढ़ा है। इस बार देवरी व पाटलियाकुल्मी में इनकी बुवाई ज्यादा हुई है। किसान रामगोपाल लोधा ने बताया कि इन फसलों पर मौसम की मार कम होती है। किशनपुरा निवासी बालचंद मीणा ने बताया कि इस वर्ष इन फसलों के भाव उम्मीद से अधिक मिलेंगे। वहीं क्षेत्र में काबुली चने की फसल देखकर लगता है किसानों के अच्छे दिन आने वाले हंै।
छात्रों ने मधुमक्खियों के बारे में जाना
झालरापाटन. भारतीय कृषि अनुसंधान और विश्वबैंक के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने सोमवार को उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय का भ्रमण किया। २८ विद्यार्थियों के इस दल को इकाई प्रभारी डॉ. सुरेश कुमार जाट ने मधुमक्खियों की क्रिया विधियों के बारे में जानकारी दी। फार्म प्रभारी डॉ. प्रेरक भटनागर, महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आईबी मोर्य, भ्रमण प्रभारी डॉ. नरेन्द्र पारीक, सहप्रभारी डॉ. विजय शंकर आचार्य व केशव मेहरा ने भी जानकारी दी।

Published on:
22 Jan 2019 12:24 pm