झालावाड़

जिंदा दिली से बीता रहे जिंदगी की ढ़लती शाम…

-स्वस्थ्य व मस्त शतायुपार दम्पति-सैकड़ो सदस्य के साथ संयुक्त परिवार में मिसाल बन रहे
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Life is changing from the life of Late evening ...
जिंदा दिली से बीता रहे जिंदगी की ढ़लती शाम...


जिंदा दिली से बीता रहे जिंदगी की ढ़लती शाम...
-स्वस्थ्य व मस्त शतायुपार दम्पति
-सैकड़ो सदस्य के साथ संयुक्त परिवार में मिसाल बन रहे
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. जिले के असनावर तहसील के गांव अकतासा में एक बड़े कुनबे के बीच अपने पुत्र-पुत्रवधु, पोते-पोती, बहुएं, पड़पोते-पडपोती के साथ रहने वाले नंदलाल सुमन उर्फ नंदा जी व उनकी पत्नी कान्ही बाई दोनो शतायुपार हो चुके है लेकिन आज भी दोनो साथ-साथ रहना, खाना, सोना साथ ही करते है, सबसे बड़ी बात आज तक उनकी आंखों पर नजर का चश्मा नही चढ़ा, दोनो की दृष्टि बिलकुल ठीक है। कान भी बराबर साथ दे रहे है, सुनने की क्षमता भी बरकरार है। वहीं जब वृद्वावस्था में अक्सर दाढ़-दांत साथ छोड़ देते है लेकिन दोनो के दांत सलामत है हालाकि कुछ कम हो गए लेकिन आज भी नंदाजी अपनी पत्नि के लिए स्वयं नमकीन सेव व चने लाता है और दोनो साथ स्वाद लेकर चबाते है। गांव में स्थित ईमित्र की दुकान पर भी बिना लकड़ी के सहारे के पेंशन लेने दोनो साथ जाते है। गांव में हालाकि एक बड़े भूभाग में पूरा परिवार साथ रहता है लेकिन यह दोनो अपने कमरे में स्वयं का काम खुद करते है। नंदाजी अपनी पत्नि को खुद सम्भालते है उसे सुबह जगाकर, नहाने के बाद उसे तैयार करना, कपड़े पहनाना, खाना खाना आदि दोनो एक दूसरें के सहयोग से करते रहते है।
-शुद्व खानपान, स्वच्छ वातावरण व प्रकृति के बीच का हुआ असर
११० वर्षीय नंदाजी ने बताया कि उनके पिता मोतीलाल व माता केसरबाई भी शतायुपार होकर ही दिवंगत हुए थे। उनकी पत्नी भी १०० वर्ष पूर्ण कर अब शतायुपार हो चुकी है। उनके पास ७० बीघा जमीन है जिसमें वह खेती बाड़ी करते है। पशुओं की सेवा के बाद दिनभर गाय भैस का दूध पीना व खेत में जमकर मेहनत करना ही वह अपनी आयु का राज बताते है।
-यह है बड़ा कुनबा
नंदाजी के तीन पुत्र व दो पुत्रियां, 6 पोत्र, 10 पोत्रियां, 10 पड़पोत्र व 13 पड़पोत्रियों है। सबसे बड़े पुत्र मोहनलाल की आयु 85 वर्ष है वह भी स्वस्थ है। इनके बाद बाबू लाल व लालचंद। दो पुत्रियां जानकी बाई व मोतिया बाई यह सब वृद्व हो चुके है। सबसे बड़े पुत्र मोहनलाल के तीन पुत्र राजेश, दशरथ, रामस्वरुप व पांच पुत्रियांं गुडडीबाई, शांतिबाई, हेमा बाई, माया, मंजू व चंदा है। दूसरे पुत्र बाबूलाल के दो पुत्र प्रकाश व कन्हैयालाल व दो पुत्रियां भूरी बाई व राधाबाई है। तीसरे पुत्र लालचंद के एक पुत्र बबलू व दो पुत्रियां संजना व संगीता है। इसके बाद पड़ पोत्र व पड़ पोङ्क्षत्रयां है। इस कुनबे का सबसे छोटा सदस्य नंदाजी का पड़पोत्र चार वर्षीय अंकित है।
-विवाह में खुद बालिग, पत्नी नाबालिग
नंदाजी ने बताया कि जब उनकी शादी हुई तो उनकी आयु 22 साल थी लेकिन उनकी पत्नी 11 साल की आयु की थी। शादी के बाद से ही दोनो साथ साथ खेत में मेहनत करते रहे।
-निशानेबाज रहे
उन्होने बताया कि एक बार गांव में उनके घर से चोरी करके दो कंजर भाग रहे थे ता ेउन्होने दोनो को अकेेले में पकड़ कर झालावाड़ राजपरिवार में पेश कर दिया था इस पर तत्कालीन नरेश ने उन्हे बंदूक दिलवाई व शिकार के समय जाते हुए दरबार उन्हे भी साथ ले जाने लगे थे। रातादेवी के जंगल में राजनरेश जब भी शिकार पर आते तो नंदाजी भी साथ रहते व गोली पहले यही दागते थे। आज भी वह बंदूक रख कर खेत में रखवाली करते है।
-उत्सव के दौरान लग जाता है परिवार का मेला
नंदाजी के इतने बडे कुनबे में जब भी कोई उत्सव होता है तो बाहर रहने वाले पुत्रियां व दामाद आदि सहित पूरा परिवार एकत्र होता है और छोटे-बड़े सैकड़ो सदस्य अपने बड़ेबूढ़ो का आर्शिवाद प्राप्त कर लेते है। नंदाजी के पोत्र राजेश ने बताया कि गत 27 अप्रेल को उनकी पुत्री मीनाक्ष्ी का विवाह कार्यक्रम हुआ था। इसमें परिवार से सभी सदस्य शामिल हुए थे।हर माह किसी ना किसी का जन्मदिन आदि मन जाता है और त्यौहार आदि पर भी परिवार के सभी सदस्य एकत्र होते है। इस पर पूरे गांव में चर्चा चलती रहती है। वर्तमान में जहां एक ओर संयुक्त परिवार विघटन होकर खत्म हो रहे है व लोग एकांकी जीवन जीने लगे है, ऐसे समय में नंदाजी का संयुक्त परिवार समाज में मिसाल कायम कर रहा है।

Published on:
05 Jul 2018 05:10 pm