झालावाड़

Jhalawar Medical College : मेडिकल कॉलेज के परम विशेषज्ञ बने निजी अस्पतालों के पोस्टर बॉय

नौकरी सरकारी, काम निजी में : शहर से लेकर मध्यप्रदेश की सीमा तक लगे पोस्टर
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Medical college's ultimate expert becomes poster boy of private hospitals
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज का भवन

झालावाड़. मेडिकल कॉलेज झालावाड़ में नियुक्त परम विशेषज्ञ चिकित्सक नियमों के विपरीत निजी अस्पतालों में भी सेवाएं दे रहे हैं। यह कार्य चोरी-छिपे नहीं बल्कि पूरे जोर शोर से हो रहा है। शहर से लेकर मध्यप्रदेश की सीमा तक लगे इन निजी अस्पतालों के होर्डिंग व पोस्टरों में इन चिकित्सकों के फोटो छपे हुए हैं। इनके अलावा भी कुछ चिकित्सक चोरी-छिपे निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। इस बारे में सबकुछ जानते हुए भी मेडिकल कालेज प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है।

पिछले दिनों राजस्थान पत्रिका ने मेडिकल कालेज अस्पताल की अव्यवस्थाओं व सुविधाओं की कमी को लेकर समाचार अभियान चलाया था। इसके बाद हरकत में आई राज्य सरकार ने यहां परम विशेषज्ञ समेत 67 चिकित्सकों की नियुक्ति की थी। परम विशेषज्ञ चिकित्सकों के आने के बाद यहां कई नए विभाग खुले। इनमें न्यूरो सर्जरी व यूरोलॉजी विभाग भी शामिल थे।

न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी व यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल नेनीवाल को बनाया गया। इनके लिए अस्पताल में वार्ड, आईसीयू, रेजीडेंट चिकित्सक और नर्सिंग स्टॉफ आदि उपलब्ध कराए,लेकिन इनका ध्यान निजी अस्पतालों में ही है। वे सरकारी अस्पताल में कम में निजी अस्पताल में ज्यादा समय दे रहे हैं। इनमें से तो एक चिकित्सक निजी अस्पताल परिसर में ही परिवार के साथ रह रहे हैं।निजी में जाने की मजबूरीपरम विशेषज्ञ सेवा शुरू होने के बाद लोगों को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बड़े शहरों जैसा इलाज मिलने की आस बंधी है, लेकिन इन चिकित्सकों के निजी अस्पतालों में सेवाएं देने से मरीजों को वहां जाकर इलाज कराना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है।

मोटी कमाई पर ध्यानपरम विशेषज्ञ होनेे के कारण निजी अस्पतालों में हमेशा इनकी मांग रहती है। इसके लिए इनको मोटा पारिश्रमिक दिया जाता है। ये चिकित्सक सरकार से तनख्वाह लेने के साथ निजी अस्पतालों से भी मुहंमांगी रकम ले रहे है।

जिला प्रशासन ने की थी कार्रवाई

निजी अस्पतालों में सेवाएं देने वाले सरकारी चिकित्सकों के खिलाफ करीब दो साल पहले जिला प्रशासन ने जांच कराई थी। तब तत्कालीन जिला कलक्टर हरिमोहन मीणा ने झालावाड़ मेडिकल कॉलेज प्रशासन को तीन सरकारी चिकित्सकों का एनपीए रोकने और पांच चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए बाद मेडिकल कॉलेज के डीन ने तीन सरकारी चिकित्सकों का एनपीए रोका था और पांच को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

सरकारी चिकित्सक ऐसा नहीं कर सकते। अगर कर रहे हैं तो यह गंभीर बात है। इसकी पूरी जांच करवाएंगे और सख्त कार्रवाई करेंगे। सरकार को इस बारे में लिखेंगे।

- डॉ. शिवभगवान शर्मा, डीन मेडिकल कॉलेज झालावाड़

हमें इस बारे में जानकारी नहीं है और किसी के बारे में कोई शिकायत भी नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई करेंगे।

-डॉ. संजय पोरवाल, अधीक्षक एसआरजी अस्पताल, झालावाड़

मैं तो कई बार होर्डिंग्स हटाने को कह चुका हूं। फिलहाल मैं निजी अस्पताल में काम भी छोड़ चुका हूं। जल्दी मैं होर्डिंग को लेकर लिखित में शिकायत दूंगा।

- डॉ. विशाल नेनीवाल, यूरोलॉजिस्ट

हां यह सही है कि मैं परिवार सहित निजी अस्पताल के केम्पस में ही रहता हूं, लेकिन मैं यहां सेवा नहीं दे रहा हूं। मैं पूरा समय एसआरजी अस्पताल को दे रहा हूं।

- डॉ.रामसेवक योगी, न्यूरो सर्जन

Updated on:
08 Oct 2023 04:21 pm
Published on:
08 Oct 2023 04:21 pm