झालावाड़

सरकार के घर में 18 उम्मीदों की जरुरत… पढ़े

जिले की 18 जरूरतें जो विकास को पंख लगा सकती हैं
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Updated: 1 Jan 2018, 1:09 PM IST
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सरकार के घर में 18 उम्मीदों की जरुरत... पढ़े

सरकार की मजबूरी कहें या दरियादिली! दिया तो जिले को बहुत कुछ लेकिन अब जो दिया उन प्रोजेक्टस को अमलीजामा पहनाने की जरूरत है। सरकार के हिसाब से कार्य तो शुरू हो गए लेकिन कई कार्यों को अभी भी दु्रत गति से किए जाने की दरकार है। इनमें कैंसर अस्पताल एवं हाइवे के जीर्णोद्धार के कार्य तो सरकार आने के साथ ही चार साल पहले शुरू हुए थे लेकिन प्रक्रियाएं एवं लालफीताशाही में उलझने के कारण यह पूरे होने का नाम नहीं ले रहे है। इसी तरह झालावाड़-कोटा रेल लाइन का विद्युतीकरण होने के बाद दूरगामी ट्रेनें जयपुर व दिल्ली के लिए शुरू किए जाने में सरकार की मंशा शायद नहीं है। यहीं कारण है कि यह ट्रेनें भी अभी तक शुरू नहीं हो पा रही है। नए 2018 में जिले की महत्वपूर्ण 18 जरूरत हम बता रहे हैं जो पूरे हो जाए तो यहां विकास को पंख मिल सकते हैं।

1.औद्योगिकीकरण हो मिटे बेरोजगारी
सर्वाधिक समस्या बेरोजगारी है। इसके लिए इस वर्ष नई औद्योगिक इकाइयां खोले जाने की दरकार है। ताकि जिले के युवाओं को रोजगार मिल सके। जिले में औद्योगिकीकरण की बातें तो खूब हुई। लेकिन इसके प्रयास देखें तो ढाक के तीन पात है। ऐसे में यहां के युवाओं को रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ रहा है।

2.ट्रेन कनेक्टिविटी का हो विस्तार
शहर में ट्रेन कनेक्टिविटी का विस्तार होना आवश्यक है। झालावाड़ से कोटा ? लाइन का विद्युतीकरण होने के बाद अब लंबी दूरी की ट्रेन चलने की दरकार है। जयपुर व कोटा के लिए एक फैरा दिन में और बढ़ जाए तो लोगों को राहत मिले। इसके लिए कोई प्रयास नहीं हुए। सार्थक प्रयास किए जाते तो हो सकता है अभी तक यह ट्रेनें झालावाड़ से शुरू हो जाते।

3.कैथ लेब बने तो मिले लाभ
मेडिकल कॉलेज स्तर का अस्पताल होने के बाद भी यहां हार्ट के रोगियों के लिए कैथ लेब नहीं है। यदि कैथ लेब हो तो हार्ट के रोगियों को उपचार के लिए कोटा व जयपुर नहीं जाना पड़े। इसके लिए करीब ५ करोड़ के प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन है। लेकिन इन पर अमल हो जाए तो इस वर्ष से यह सुविधा यहां शुरू हो सके।


4.प्रोफेशनल कोर्सेज व कॉलेज हो शुरू
जिले का हाडौती व मध्यप्रदेश से जुड़ाव होने के बाद भी यहां आयुर्वेदिक, वेटेनरी समेत कई कॉलेजों की दरकार है। ताकि मेडिकल स्टूडेंट को एमबीबीएस एवं नर्सिंग के बाद यहीं कॉलेजों में प्रवेश मिल सके। वहीं मेडिकल कॉलेज में बीपीटी समेत एमएससी कोर्सेज शुरू किए जाने की दरकार है।

5.फार्मास्यूटिकल कॉलेज खुले
केन्द्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज स्तर पर फार्मास्यूटिकल कॉलेज खोलने के लिए अस्पताल प्रशासन से प्रस्ताव मांगे थे। लेकिन अभी तक यह कॉलेज नहीं खुला। यह कॉलेज खुले तो विद्यार्थियों को बीफार्मा व एमफार्मा की सुविधा भी यहीं मिले। वहीं विद्यार्थियों को इन कोर्सेज में प्रवेश के लिए बाहर नहीं जाना पड़े।

6.नाइपर का इंतजार हो खत्म
राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व रिसर्जेन्ट राजस्थान में नाइपर खोलने के लिए करार किया था। इसके तहत केन्द्र सरकार ने ५०० करोड़ की राशि स्वीकृत की थी। दो बार टीम आई। मेडिकल कॉलेज जहां कक्षाएं शुरू करनी थी इन कक्षों का निरीक्षण किया। इसके बाद बात आई-गई हो चली।

7.अन्तरराष्ट्रीय हवाई-अड्डा बने
कोलाना हवाई-अड्डे के प्रथम चरण के विस्तार के लिए १६९ करोड़ रुपए दिए गए। लेकिन अब इसके विस्तारीकरण की दिशा में भी प्रयास चल रहे है। सब कुछ ठीक रहा तो यहां इंटरनेशनल लाइट भी शुरू करने की तैयारी है। जो इस वर्ष शुरू हो तो देश के मानचित्र पर झालावाड़ का नाम चमके।



8..24 घंटे पानी का सपना हो पूरा
करीब ७५ करोड़ की लागत से जलदाय विभाग द्वारा अमृत योजना में शहर में करीब आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर टंकियों का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि पानी की कमी जिले में नहीं है। यदि हालात ठीक रहे तो शहर में २४ घंटे पानी की आपूर्ति का सपना पूरा होगा।

9.कैंसर अस्पताल
गत चार वर्ष से कैंसर अस्पताल हिचकोले खा रहा है। कभी नक्शा तो कभी तकनीकी ाामी। इसके चलते फिलहाल कैंसर रोगियों को उपचार के लिए जयपुर व मुंबई की राह ताकनी पड़ रही है। इस वर्ष कैंसर अस्पताल के अस्तित्व में आने से कैंसर रोगियों को राहत मिलने की उमीद है।

10.झालावाड़-कोटा रोड बने
फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग ५२ पर राजमार्ग के निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके तहत कोटा से मंडाना व मंडाना से दरा तक का कार्य निर्माणाधीन है। लेकिन झालावाड़ से सुकेत वाया दरा तक बनने वाले कार्य के लिए निविदा का कार्य पूरा हो चुका है। फिलहाल जमीन अवाप्ति का कार्य चल रहा है। लेकिन यह कार्य कब पूरा होगा। यह तो भविष्य के गर्त में है। ऐसे में इस वर्ष इस रोड के बनने की आशा भी लोगों को है।

11.स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी हो
जिलेभर में कई स्कूलों में शिक्षक नहीं है, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने व बेहतर शिक्षा के लिए नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएं। अभी जिले में करीब २६० से अधिक स्कूल ऐसे में है, जिनमें एक ही शिक्षक होने से छात्रों सहित शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कम संया वाले स्कूलों को रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाएं। आरपीएससी से शिक्षकों सहित कॉलेज व्यायाताओं की भर्ती निकाली जाएं।

12.ठेका पद्धति हो बंद
जिलेभर में सभी विभागों में ठेके पर कर्मचारी लगा रो हैं। इससे संबंधित प्लेसमेंट कंपनी, व्यक्ति को व्यक्ति नहीं मानकर वस्तु मानते हैं। बेरोजगार युवाओं की नौकरी करते हुए उम्र निकल जाती है, लेकिन उनकों न तो स्थाई किया जाता है और नहीं कोई लाभ मिल पाता है। इसके चलते युवाओं को स्थाई नौकरी दी जाएं। मेडिकल जैसी व्यवस्थाएं ठेका पर चल रही है।

13.समर्थन मूल्य घोषित किया जाएं
किसानों की सभी फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाएं। बीमा क्लेम के आंकलन व सर्वे की पद्धति बदली जाएं, किसान की फसलें कटने के बाद कंपनी व अधिकारी पहुंचते हैं,इससे किसानों को बीमा कराने का लाभ नहीं मिल पाता है। प्राकृतिक व बीमा क्लेम नहीं मिलने से दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।

14.खुले विश्वविद्यालय-
पूरे जिले में सबसे बड़ा महाविद्यालय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। यहां पर्याप्त स्थान व सुविधाएं है। यहां संत पीपाजी विश्वविद्यालय खोला जा सकता है। इससे जिले के छात्रों को भी बेहतर उच्च की सुविधा मुहैया हो सकेंगी। वहीं कोटा विश्वविद्यालय पर छात्रों के अधिक दबाव से भी निजात मिलेंगी।

15.ग्रामीणों को रोजगार के लिए लोन की सुविधा मिले-
जिले में बेरोजगारी बहुत अधिक है। इससे निजात दिलाने के लिए शिक्षित व दक्ष युवाओं को प्रत्येक ग्राम स्तर पर ५० हजार से एक लाख तक का छोटा-छोटा ऋण देकर रोजगार से जोड़ा जाएं। इसके लिए सरकार की चल रही योजनाओं में बदलाव किया जाएं।

16.किसानों को समय पर बिजली उपलब्ध कराई जाएं-
जिले में किसानों को सस्ती दर पर व दिन के समय ही बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे किसानों को सर्दी के समय में होने वाली परेशानी से निजात मिले व सस्ती दर पर बिजली देने से किसानों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़े।

17.खुले हॉर्टीकल्चर विश्वविद्यालय-
जिले में उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय में पर्याप्त व संसाधन भी है। यह राज्य का प्रथम उद्यानिकी महाविद्यालय महाविद्यालय है। ऐसे में राज्य में इससे जुड़े अन्य कॉलेज खोले जाएंगे। इससे राज्यभर के युवाओं को उद्यानिकी एवं वानिकी के अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी। जिले में वाइल्ड लाइफ के क्षेत्र में केरियर की अपार संभावनाएं है।

18.संतरा प्रोससिंग इकाई लगे
प्रदेश का 85 फीसदी संतरा झालावाड़ में पैदा होता है। लेकिन जिले में संतरा प्रोसेसिंग इकाई नहीं होने व कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होने से किसानों को अपना संतरा जल्दी ही बेचना पड़ता है। संतरा नाजुक फल होने से इसे ज्यादा दिन नहीं रख सकते हैं। इसके चलते किसानों को जल्दी ही बैचना पड़ता है। जिले में अगर प्रोसेसिंग इकाई खुले तो जिले के युवाओं को रोजगार मिल सकता है।

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