झालावाड़

अब सार्वजनिक वाहनों में बिना जीपीएस नहीं होगा पंजीयन

-चोरी व छेड़छाड की घटनाओं पर लगेगी रोक-परिवहन अधिकारियों को दिए निर्देश
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अब सार्वजनिक वाहनों में बिना जीपीएस नहीं होगा पंजीयन


झालावाड़.अब नए खरीदने वाले सभी सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (जीपीएस) व पेनिक बटन (इमरजेंसी बटन) लगाना अनिवार्य होगा। यह वाहन लगाने के बाद ही वाहन पंजीकृत किया जाएगा। परिवहन विभाग यह दोनों डिवाइस नहीं होने की स्थिति में वाहन का पंजीन नहीं करेगा। इस आशय के ओदश हाल ही में संयुक्त परिवहन विभाग आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिला परिवहन अधिकारियों को जारी कर इसकी पालना सुनिश्चित करने के लिए कहा है।


यह निर्देश दिए आदेश-
आयुक्त द्वारा जारी आदेश में बताया है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 28 फरवरी 2019 के बाद पंजीकृत होने वाले सभी वाहनों में एंव 31 दिसम्बर 2018 तक पूर्व में पंजीकृत सभी सार्वजनिक परिवहन वाहन में जैसे दुपहिया, ई-रिक्शा, तिपहिया और कोई परिवहन यान जिसके लिए मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 59 के अधीन परमिट अपेक्षित नहीं होता है, को छोड़कर अन्य व्हीकल में लोकेशन ट्रैंकिंग डिवाइस और पेनिक बटन होने के बाद ही पंजीकृत किया जाएगा। इसके अभाव में वाहनों का पंजीकरण नहीं हो सकेगा।


कंपनी को लगाना होगा डिवाइस-
अधिसूचना के अनुसार नए वाहनों में डिवाइस निर्माता स्वयं लगाकर देंगे या डीलर की ओर से लगवाए जाएंगे। पुराने वाहनों में डिवाइस लगाने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। जिन टैक्सी वालों ने इस वर्ष मार्च में टैक्सी खरीदी है, उन्हें नए नियम की जानकारी नहीं थी। वाहनों में यह नहीं लगे होने की स्थिति में परिवहन विभाग ऐसे वाहनों का पंजीयन नहीं करेगा। वहीं पुराने वाहनों को 28 फरवरी 2019 से पहले कंपनियों ने निर्माण कर लिए उन वाहनों पर डिवाइस एवं पेनिक बटन डीलर लगाकर देंगे।

वाहनों की लोकेशन का चलेगा पता-
पहले कई बार किसी वाहन की दुर्घटना होने पर पुलिस को उस वाहन तक पहुंचने में काफी परेशानी आती थी, लेकिन अब जीपीएस सिस्टम लगा होने से पुलिस व 108 वाहन को दुर्घटना वाले स्थान पर पहुंचने में किसी प्रकार की परेशान नहीं होगी। कोई वारदात होने के बाद पुलिस अपराधी तक नहीं पहुंच पाती है, ऐसे में अब व्हीकल में ट्रेकिंग डिवाइस जीपीएस लगे होने वाले से वाहनों की लोकेशन आदि की जानकारी सॉफ्टवेयर के माध्यम से तुरंत मिल सकेगी।


आपातकाल में करेगा मदद-
नए सिस्टम के अनुसार जिस तरह से रेल में जो आपातकालीन बटन जैसे चेन सिस्टम होता है, वैसा ही अब सार्वजनिक वाहनों बस, ट्रक व टैक्सी परमिट वाहनों में पैनिक बटन लगेगा। वाहनों में यह आपातकालीन बटन के नाम से होगा। जिसको दबाते ही परिवहन व पुलिस विभाग को इसकी जानकारी तुरंत मिल जाएगी। यह बटन आग लगने व आपात स्थिति में मदद करेगा।


वाहन मालिक को ये होगी स्वतंत्रा-
विभागीय अधिकारी केन्द्रीय मोटर यान नियम 1989 के 125 के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही फिटनेस प्रमाण के लिए वाहनों की जांच के समय सार्वजनिक वाहनों में वीएलटी डिवाइस की फिटनेस और कार्यात्मक स्थिति की जांच करेंगे। मालिक को किसी भी निर्माता से अपनी पंसद की वीएलटी डिवाइस चुनने की स्वतंत्रा होगी। वह अपने हिसाब से यह डिवाइस अपने वाहन में लगा सकेगा।


पुलिस को भी होगी आसानी-

परिवहन विभाग का अच्छा कदम है, सार्वजनिक वाहनों में इस डिवाइस के लगाने से दुर्घटनाओं और आपराधिक वारदातों में कमी आएगी। साथ ही आपातकालीन स्थिति में कॉल आते ही पुलिस व 108 आदि को पहुंंचने में कोई परेशानी नहीं होगी।
विजय कश्यप, यातायात सलाहकार।

जीपीएस व पेनिक बटन का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इससे बस या किसी भी सार्वजनिक वाहन में महिलाओं की सुरक्षा रहेंगी। महिलाओं के साथ अगर किसी प्रकार की छेड़छाड़ होती है तो इसकी शिकायत सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीधे थाने में जाएगी।
भगवान करमचंदानी, जिला परिवहन अधिकारी, झालावाड़।

Published on:
20 Feb 2019 11:59 am