
झालरापाटन. हॉर्टिकल्चर कॉलेज में आयोजित २१ सदी के लिए उद्यानिकी में प्रगत तकनीकी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को समापन हुआ।
मुख्य अतिथि बर्मीओक सिक्किम के उद्यानिकी महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि उत्तम शिक्षा के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम करने वाले झालावाड़ के हॉर्टिकल्चर कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय खुलने से यहां के किसानों, विद्यार्थियों व उद्यमियों को कॉफी लाभ मिलेगा। उन्होंने सिक्किम में कार्बनिक खेती की संभावनाओं के बारे में बताया।
डॉ. लालूप्रसाद यादव ने परवल सब्जी के उत्तम जर्म प्लाज्म का श्रेणी करण कर उसे आद्र और जलवायु के लिए अनुकूल बताते हुए कहा कि एक परवल की बेल से १२ से १४ किलो फल प्राप्त किया जा सकता है जिसकी औषत कीमत ४० रुपए के हिसाब से ४८० से ५६० रुपए तक तीन महिने में प्राप्त की जा सकती है। दिल्ली के डॉ. अवनी कुमार ङ्क्षसह ने संरक्षित खेती में विभिन्न अनुप्रेषण व नवाचार के माध्यम से उत्पादन ४ से ५ गुना कर आय तीन गुना बढ़ाने के बारे में बताया।
बीमारियों से बचाएगी चावल की भूसी
अधिष्ठाता डॉ. आईबी मोर्य ने पॉलीहाऊस नेट हाउस के माध्यम से होने वाली सब्जियों के उत्पादन की जानकारी देते हुए बताया। निमेटोड जैसी बीमारियों से बचाव के लिए कोकोपीट व चारकोल के स्थान पर चावल की भूसी का उपयोग किया जाना चाहिए। डॉ. सीताराम पाटीदार ने संतरा विपणन व इसके बाजार के बारे में बताया। डॉ. एस बीएस पांडे ने उद्यानिकी फसलों में तकनीकी अनुप्रयोगो में आने वाली कठिनाइयों का समाधान बताया। डॉ. एके सिंह ने माइनर फू्रट्स के आयाम की जानकारी दी। कोटा कृषि विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह ने विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा दी राय ओर सिफारिशों के आधार पर उपयोगी जानकारी दी। आयोजक डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दो दिवसीय संगोष्ठी का विवरण प्रस्तुत किया। जिले के मानपुरा निवासी हुकमचंद पाटीदार को जैविक खेती के लिए पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे जाने पर उनका सम्मान किया। डॉ. प्रेरक भटनागर, डॉ. संजय सिंह, डॉ. ओपी अवस्थी, डॉ. आशुतोष मिश्रा, एसके जैन, डॉ. सीके आर्य, मीडिया प्रभारी डॉ. पीएस चौहान ने भी विचार व्यक्त किए।