जून 2021 में पूरा होगा काम : 57 किलोमीटर में सीवरेज लाइन डालनी शेष
झालावाड़. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बनाए पंप हाऊस का कार्य अब जून 2021 में पूरा होगा। पहले यह कार्य फरवरी 2020 में होना था। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही यह पंप हाऊस बनाए जाने थे, लेकिन पूर्व में कुछ बजट की कमी एवं समय पर बजट नहीं आने से कार्यों में देरी होती चली गई। ट्रीटमेंट प्लांट करीब छह साल पहले ही बना दिया गया। जबकि पंप हाऊस का काम अभी चल रहा है। ऐसे में इस पानी का पूरा सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
सीवरेज के लिए शहर में तीन पंप हाऊस मुंडेरी पुलिया के समीप 6.37, खंडिया स्थित राठौर छात्रावास के पास 1.20 एवं बड़ के बालाजी के पास 1.97 एमएलडी क्षमता के पंप हाउस बनाए गए है। इनमें मुंडेरी पुलिया के समीप पंप हाऊस का कार्य लगभग पूरा होने को है। जबकि शेष दो पंप हाऊस का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। अधिकारियों की मानें तो इन दोनों पंप हाऊस का करीब 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
पंप हाऊस बनने के बाद यहां शहर के गंदे पानी को एकत्र कर लाइनों के माध्यम से सीवरेज प्लांट में पानी का ट्रीटमेंट (उपचारित) करने के लिए भेजा जाएगा। सीवरेज प्लांट में आए इस गंदे पानी को दुबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा। फिलहाल शहर में 6 एमएलडी का सीवरेज प्लांट पीपानंद धाम रोड पर इंस्टाल किया जा चुका है, लेकिन इस प्लांट के माध्यम से सीवरेज पानी का ट्रीटमेंट समुचित नहीं हो रहा है। पंप हाऊस बनने के बाद पूरे शहर का पानी इन तीनों पंप हाऊस में आएगा। इसके बाद इस पानी को ट्रीटमेंट के लिए सीवरेज प्लांट में भेजा जाएगा।
पानी का शोधन नहीं हो रहा है
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में अभी पानी जो आ रहा है वो सीवर की लाइनों के माध्यम से आ रहा है, लेकिन पंप हाऊस बनने के बाद गलियों एवं मोहल्लों में डाली सीवरेज लाइनों के माध्यम से सीवरेज प्लांट में जाएगा। यहां इस पानी की सफाई कर इसका पुन उपयोग किया जा सकेगा।
57 किलोमीटर लाइन डालना शेष
पंप हाऊस से यह पानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में लाइनों के माध्यम से जाएगा। इसके लिए झालावाड़ शहर में कुल 107 किलोमीटर की सीवर लाइन बिछाई जानी है, लेकिन अभी तक 50 किलोमीटर ही लाइन बिछ सकी है। शेष 57 किलोमीटर में सीवरेज की लाइन और बिछाया जाना है।
पंप हाऊस का काम देरी से चल रहा है। जल्द पूरा करेंगे। पंप हाऊस बनने के बाद गंदे पानी का उपयोग कर इसे दूसरे कामों में भी लिया जाएगा।
रामबाबू, सहायक अभियंता आरयूआईडीपी, झालावाड़