अनुदान लेना विवाह सम्मेलनों के संचालकों व नव दम्पतियों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है
झालावाड़.सामूहिक विवाह सम्मेलनों में सात फेर लेने वाले जोड़ों को कितना फायदा है यह तो जग जाहिर है। जहां सम्मेलनों में नि:शुल्क या बहुत ही कम राशि में विवाह हो जाता है, वहीं सरकार भी जोड़ों को अनुदान देती है। लेकिन अनुदान लेना विवाह सम्मेलनों के संचालकों व नव दम्पतियों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। महिला अधिकारिता विभाग के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो कम से कम 300 जोड़ों का अनुदान गत दो साल से अटका हुआ है। विभिन्न समाज की संस्थाओं व जोड़ों को इस अनुदान का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2024 और 2025 में कई जोड़े को अनुदान नहीं मिला है। जिले में दर्जनों संस्थाओं व जोड़ों का अनुदान बकाया चल रहा है। आयोजक संस्थाओं के मुताबिक अनुदान लेना किसी झंझट से कम नहीं, ऐसे में कई संस्थाएं तो आवेदन हीं नहीं करती। इसके चलते सामूहिक विवाह सम्मेलनों की संख्या में भी कमी आती जा रही है। महिला एवं अधिकारिता विभाग पिछले वित्तीय वर्ष के 9 माह में 60 फीसदी बजट खर्च नहीं कर पाया है। ऐसे में प्रदेशभर में जोड़ो की संख्या भी 2200 तक ही रह गई है।
महिला एवं अधिकारिता विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसी संस्था द्वारा कम से कम 10 जोड़ों का सामूहिक विवाह करने पर जोड़ों को अनुदान दिया जाता है। सम्मेलन में विवाह पर प्रति जोड़ेको25 हजार का अनुदान सरकार देती है। इसमें 21 हजार दुल्हन के खोते में व 4 हजार संस्था को प्रोत्साहन के रूप में दिए जाते हैं।
वर्ष-2024 व 25 में महिला अधिकारिता विभाग के पास करीब 50 से अधिक संस्थाओं के आवेदन मिले। इनमें से दो साल से अभी तक किसी को भी विवाह अनुदान नहीं मिला। जबकि कई आवेदन निरस्त हो गए। हालांकि कुछ फाइलेप्रक्रियाधीन है। जबकि कुछ फाइलों में कमियां पाई गई हैं।
सत्र जोड़ेराशि
2024 -25 4495 1180.91
2025-26 2202 594.10
सामूहिक विवाह सम्मेलन समिति के राकेश गुर्जर ने बताया कि वर्ष 2024 व 2025 में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन का संस्था व जोड़ों को अनुदान नहीं मिला। नियमों की जटिलता भी बड़ी समस्या है। कई बार बजट नहीं होने की बात कही जाती है। दो साल से अभी तक राशि नहीं मिलने से लोगों की सम्मेलन से रूचि खत्म होती जा रही है।
धनवाड़ा देवनारायण मंदिर सेवा समिति के जगदीश बताते हैं कि पांच-छह साल से लगातार सम्मेलन कर रहे हैं। दो साल से अनुदान नहीं मिला। वहीं माली समाज की समितियों के पदाधिकारी रहे देवकरण सुमन का कहना है कि अनुदान के लिए इतनी खानापूर्ति है कि इसे पूर्ण करना ही मुश्किल है। इससे कई संस्थाओं के आवेदन निरस्त हो जाते हैं।
बाल विवाह व दहेज प्रथा रोकने के साथ शादियों पर होने वाले खर्चे से लोगों को राहत देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। सरकार प्रति जोड़ा 25 हजार रुपए खर्च कर रही है। योजना के तहत सामूहिक विवाह कराने वाली आयोजन संस्था को दस लाख रुपए तक की सहायता दी जाती है। फिर भी संस्थाएं योजना का लाभ नहीं उठा पा रही है।
अनुदान के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर सहीं पाए गए आवेदक संस्थाओं को अनुदान देने की प्रक्रिया जारी है। कई आवेदनों में कमियां पाई गई उन्हे दूर करने के लिए कहा गया है।