झालावाड़

देवस्थान विभाग के मंदिरों की जमीनों पर कब्जे, अफसर दौड़ा रहे सिर्फ कागजी घोड़े

    - जिले में भगवान की २९ बीघा जमीन अतिक्रमियों के कब्जे में - विभाग ने कार्रवाई के निर्देश दिए राजस्व विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
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Updated: 4 Apr 2022, 5:57 PM IST
The lands of the temples of the Devasthan Department are occupied, the
देवस्थान विभाग के मंदिरों की जमीनों पर कब्जे, अफसर दौड़ा रहे सिर्फ कागजी घोड़े

एक्सक्लूसिव

हरिसिंह गुर्जर

झालावाड़.देवस्थान विभागके मंदिरों की जमीनों पर अतिक्रमियों ने कब्जे जमा रखे हैं। सरकारी सुस्ती के चलते अतिक्रमियों को बेशकीमती जमीनों से बेदखल करना चुतौनी बना हुआ है। जिम्मेदार अधिकारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौडा रहेहैं। स्थिति जस की तस है। कई मामले बरसों से कोर्ट-कचहरी में चल रहे हैं। करीब २५ साल पुराने मामलों में प्रभावी पैरवी नहीं होने से विभाग आज भी ऐसे मामलों में कुछ नहीं कर पाया है। राज्यभर में देवस्थान विभाग के मंदिरों की संपत्तियों पर कब्जे हैं। इनमें अधिकांश स्थानों पर उन लोगों ने ही कब्जे कर लिए है जिन्हे संपदा किराए पर दी गई थी।तो कुछ मामलों में पड़ौसियों ने। कई ने तो नियम विपरीत निर्माण कर उस पर भी कब्जा कर लिया है। मंदिरों की जमीनों पर भी कब्जे करने के कई मामले सामने आए है। कई मामले तो देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त कार्यालय में ही विचाराधीन है। ऐसे में प्रदेशभर में कई मामले है। झालावाड़ जिले में देवस्थान विभाग की करीब २९ बीघा से अधिक भूमि पर अतिक्रमी काबिज है। जिन्हे विभाग हटाने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

नहीं हो रही ठोस पैरवी-
देवस्थान विभाग की संपदा के कई मामले बरसों से चल रहे हैं। वर्ष २००० से पहले और स्टेट समय से केस चल रहे हैं, लेकिन ठोस पैरवी नहीं होने से मामले कोर्ट में ही प्रक्रियाधीन है। असल में विभाग की ओर से बार-बार मैन पावर की कमी बताकर ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का एक कारण भी गिनाया जाता है, ऐसे में कब्जेधारी बिना परवा कए आगे बढ़ते जाते हैं। ऐसे झालावाड़ शहर सहित जिले में कई मामले में जिनका केस कोर्ट में चल रहा है, लेकिन ठोस पैरवी नहीं होने से बरसो से केस अधर-झूल में ही चल रहे हंै।

मुख्यालय पर कब्जे, अधिकारियों का नहीं ध्यान-
शहर के बीचोंबीच खारी बावडी के यहां गोरधननाथजी मेडतनीजी मंदिर के नाम करीब ७ बीघा ११ बिस्वा भूमि है। लेकिन शहर के बीच प्राइम लोकेशन में करोड़ों रूपए की भूमि पर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया, शेष पर झाड़-झंखाड उगे हुए है। देवस्थान विभाग का अपनी जमीन पर ध्यान नहीं होने से लोग कीमती जमीन हथियाते जा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि देवस्थान विभाग को इस कीमती जमीन की पैमाईश करवाकर देवस्थानविभाग का बोर्ड लगवाकर तार फैसिंग करवानी चाहिए, ताकि इस जमीन पर लोग अतिक्रमण नहीं करें।

फैक्ट फाइल-
-गोरधननाथ जी मेड़तनीजी मंदिर झालावाड़- ७ बीघा ११ बिस्वा खारी बावड़ी के यहां अतिक्रमण
-द्वारकाधीश मंदिर राजाकुंड झालरापाटन- ३ बीघा १०बिस्वा कोई अतिक्रमण नहीं
- पीपाजी धाम मानपुर- जमीन पर मंदिर बना हुआ
- पदमनाथ जी सूर्य मंदिर ४ खसरे है-१ बीघा ८३.३५, चन्द्रलोई मुडलिया खेडा पर १.५६ बीघा पर अतिक्रमण
-द्वारकाधीश मंदिर की २१.३६५ बीघा जमीन है, जिस पर कई लोगों ने अतिक्रमण कर रखे है, जिसे विभाग ने खाली करने के लिए बोल दिया है।

सरकार ने पत्र को भी नहीं ले रहे गंभीर-
राजस्थान सरकार ने हाल ही मेंं प्रदेशभर में जहां-जहां भी देवस्थान विभाग के मंदिरों की जमीनों परअतिक्रमण व कब्जे हो रहे हैं उन्हे वापस करने व खाली करवाने के लिए ओदश तहसीलों में भेजे हैं। लेकिन तहसीलदार व राजस्व विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने से अतिक्रमी काबिज है।कई ऐसे मामले भी है जहां दुकानों व जमीन को लेकर कोर्ट में बरसों से केस चल रहे हैं। ऐसे में केस चलने से बेसकीमती जमीनों पर झांड-झंखाड उग गए है।

अतिक्रमण हटाने के आदेश -
मुख्यालय से ही सभी तहसीलदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए आदेश भेज रखे हैं, खारी बावड़ी पर मेड़तनीजी के मंदिर पर अन्य जगह अतिक्रमण झालरापाटन तहसीलदार को हटाने है। उनके पास आदेश पहले आचुके हैं। विभाग से कार्रवाई चल रही है। जिला मुख्यालय पर खारी बावड़ी जमीन पर शीघ्र बोर्ड लगवाएंगे।
विक्रमसिंह, प्रबन्धक देवस्थान विभाग, झालावाड़।

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