झालावाड़

तलाई की पाल और चरागाह को भी खनन माफियाओं ने बेच डाला

देवपुरा नयागांव का मामला
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KHANPUR
देवपुरा नयागांव का मामला

धर्मेंद्र मालव
खानपुर. देवपुरा नयागांव स्थित चरागाह और लाखों की लागत से मनरेगा योजना में बनाई तलाई की पाल को खनन माफियाओं ने खोदकर बेच दिया है।
पिछले कई माह से ईंट भट्टा संचालकों द्वारा चरागाह में पीली मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है। खननकर्ताओं को कई बार ग्रामीणों ने समझाया और पुलिस व प्रशासन को अवगत भी कराने के बाद भी रोक नहीं लगी।
संवाददाता मौके पर पहुंचा तो यहां कुछ साल पहले मनरेगा योजना में लाखों की लागत से बनाई तलाई की पाल भी गायब थी, जबकि समूची भूमि को खोदने से गहरी तलाइयां बनी मिली। आसपास कुछ मजदूर खनन करने में जुटे दिखे।
गंाव में होकर दिनभर दर्जनों की संख्या में मिट्टी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियां गुजरने से पिछले वर्ष ही बनी इंटरलॉकिंग सड़क कई स्थानों से धंस गई है। जबकि कई स्थानों पर सीसी रोड व नालियां टूट गई। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी हल्का पटवारी ने मौका-मुआयना तक नहीं किया।
सड़क में मिट्टी युक्त रेत का उपयोग
राज्य में 2 वर्षों से बजरी खनन पर रोक है। कस्बे में करोड़ों की लागत से बनी सड़कों में ठेकेदारों ने सांठगांठ कर रूपली नदी के किनारे मजदूर लगा रेत का अवैध खनन कर मिट्टीयुक्त गुणवत्ताविहीन रेत का सड़कों में उपयोग कर लिया। बाजार में अवैध रूप से बिक रही बजरी की दर 4500 से 5000 रुपए है, लेकिन नदी किनारे अवैध रूप से खनन की रेत उन्हें 2000 से 2500 रुपए ट्रॉली में उपलब्ध है। इससे ठेकेदारों के चांदी हो रही है। गत दिनों चांदखेड़ी में गौशाला से कालबेलिया टापरिया तक करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बनी सीसी सड़क में भी ठेकेदार ने यही मिट्टीयुक्त रेत काम में ली। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने मौका मुआयना कर कुछ दिनों के लिए ठेकेदार को पाबन्द किया, लेकिन उसके बाद पूरी सड़क इसी रेत से बना दी। इसके अलावा भी कस्बे सहित पंचायत क्षेत्रों में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों मे भी इसी मिट्टीयुक्त रेत का उपयोग हो रहा है।
प्रशासन को कई बार लिखित में शिकायत
देवपुरा निवासी भाजपा नेता कजोड़ीलाल मालव ने बताया कि उपखंड अधिकारी, तहसीलदार व क्षेत्रीय वन अधिकारी को उनके द्वारा कई बार लिखित में शिकायतें की जा चुकी हैं। यहां पंचायत की मिलीभगत से ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों से मिट्टी का अवैध खनन कराया जा रहा है। इस मिट्टी को कस्बे सहित उपखंड क्षेत्र में चल रहे ईंट भट्टों में उपयोग में लिया जा रहा है। शिकायत के बाद उपखंड अधिकारी द्वारा 18 मार्च को तहसीलदार, थानाधिकारी व क्षेत्रीय वन अधिकारी को पत्र जारी कर वन विभाग व चरागाह में अवैध करने वालों के खिलाफ अविलंब कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन खननकर्ताओं पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं करने से उपखंड क्षेत्र में चौतरफा मिट्टी व रेत का अवैध खनन हो रहा है।
-अवैध खननकर्ताओं पर सख्ती से कारवाई करने के आदेश जारी किए हंै। सभी अधिकारियों को इसके लिए निर्देशित किया जा चुका।
प्रमोद कुमार सिंधव, एसडीएम
-अवैध खनन पर कार्रवाई करना खनन विभाग का काम है, फिर भी सरपंच से बात कर खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाबंद किया जाएगा।
सुधीर पाठक, विकास अधिकारी
-कई बार उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, वन विभाग व पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखित में शिकायत की हंै, लेकिन कार्रवाई नहीं करने से आए दिन खननकर्ताओं को रोकने पर लड़ाई-झगड़े होते हंै।
जगदीश रैगर, सचिव, ग्राम पंचायत पिपलाज

साढ़े 3 सौ फीट बोरिंग के बाद भी नहीं निकला पानी
बकानी. पंचायत समिति की पठारी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायतों में गर्मी का मौसम शुरू होते ही पेयजल संकट मंडराने लगा है।
ग्राम पंचायत कुशलपुरा के बाडिय़ा गणेशपुरा में पेयजल के संकट को देखते हुए ग्राम पंचायत ने डांग योजना के अंतर्गत शनिवार को ट्यूबवेल लगाई। साढ़े 3 सौ फीट तक बोरिंग करने के बाद भी पानी नहीं निकला।
राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष इस क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, टैंकरों के टंडर जारी कर लोगों की प्यास बुझाने की कोशिश की जाती है, लेकिन जनप्रतिनिधि सहित प्रशासन स्थाई समाधान नहीं करता।
छापी परियोजना से जुड़े तो मिले जाए राहत
इस क्षेत्र के पास ही छापी बांध है, इस क्षेत्र से कुछ किमी की दूरी तक इस योजना की लाइन भी बिछी है, लेकिन सबसे ज्यादा पानी की समस्या से परेशान होने वाला क्षेत्र ही छापी परियोजना से वंचित है। इस समस्या का केवल एक ही स्थाई समाधान है कि इसे छापी परियोजना से जोड़ा जाए। कई बार लोगों के ज्ञापन दिए लेकिन समाधान नहीं हुआ।

Published on:
24 Mar 2019 03:42 pm