झालावाड़

जल गया 20 बीघा का जंगल, डेढ़ घंटे देरी से पहुंची दमकल

जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर काली डूंगरी में भयानक आग
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जल गया 20 बीघा का जंगल, डेढ़ घंटे देरी से पहुंची दमकल
The water of 20 bigha jungle, the fire reached by half an hour delayed

रिपोर्ट- हरिसिंह गुर्जर, गोविन्द शर्मा,


रामभरोस पांचाल की आंखों देखी
झालावाड़/भीमसागर. सुबह के साढ़े आठ बजे होंगे, सारोला-भीमसागर मार्ग पर अचानक आग की लपटें नजर आई। मैंने और वनरक्षक नवनीत गुर्जर ने खांखरे के पत्तो से आग बुझाने की बहुत कोशिश की लेकिन आग की लपटें हवा के साथ तेज हो रही थी। ऐसे में हम कुछ नहीं कर सके। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। इतनी देर में बन्या का हंसराज, रिंकू नागर व एक अन्य व्यक्ति भी वहां पहुंच गए। अब हम पांचों मिलकर आग बुझाने के लिए छटपटा रहे थे लेकिन आग पूरे जंगल में फैल चुकी थी। हमने 8.35 पर वन विभाग में अधिकारियों को फोन किया। उसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम में फोन लगाया लेकिन दमकल 10.10 बजे आई। अगर समय रहते दमकल आ जाती तो इतने जंगल का नुकसान नहीं होता। गाड़ी के आने के बाद फायरमैनों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन उनकी सं?या कम होने से जल्दी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। बाद में दो दमकल और आई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। देखते ही देखते 20 बीघा का वन क्षेत्र पूरी तरह से खाक हो गया। जिस प्राकृतिक नजारे को हम दिन-रात जाते हुए देख रहे थे, अचानक वह हमारी आंखों के सामने राख का ढेर बन गया। इसमें बबूल, खंखरा, धौंकड़ा, तेंदू, खेजड़ी, गुर्जन,अडूसा व कडबेला सहित कई वनस्पति समाप्त हो गई है।

सेटेलाइट से नहीं मिली सूचना
वन विभाग ने देहरादून से सभी वन अधिकारियों को ऑनलाइन जोड़कर कहीं भी जंगल की आग लगती है तो तुरंत सूचना मिल जाती है। लेकिन अभी जिले के डीएफओ का नंबर इस सिस्टम से नहीं जुडऩे के चलते पहले वाले अधिकारी के पास ही मैसेज जा रहा है। इससे आग की सूचना भी देरी से मिल रही है। सोमवार को करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर दमकल को पहुंचने में डेढ़ घंटे की देरी हुई है।
छोटा पड़ गया पाइप-
दमकल के पास जो पाइप था वह छोटा पड़ गया। इस पर ग्रामीणों ने फायरमैनों को गाड़ी आगे ले जाने के लिए कहा। ऐसे में फायरमैनों ने दमकल को आगे ले जाने की बजाए ग्रामीणों को कह दिया कि हैलीकाप्टर बुला लो, वह बुझा देगा आग।
इन्होंने किया आग बुझाने में सहयोग-
खानपुर रेंजर बबलूराम मीणा, बाघेर नाकेदार बाबूलाल, वनरक्षक नवनीत गुर्जर, श्यामसिंह हाड़ा, दुलीचन्द सहित कई ग्रामीणों ने आग बुझाने में सहयोग किया।

जंगल की आग बहुत निंदनीय
बाघेर काली डूंगरी स्थित जंगल में सोमवार को सुबह लगी आग से करीब 20 बीघा का जंगल खाक हो चुका है। इसमें 20 टन से अधिक लकड़ी व कई वनस्पति समाप्त हो गई है। भूमि भी अजैविक हो गई है। उसे वापस पहले की स्थिति में आने के लिए 10 वर्ष का समय लगेगा। भूमि में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टेरिया व सूक्ष्म प्लांट समाप्त हो जाते हैं। वहां की जैवविविधता समाप्त हो गए है। इसमें कोबरा, पाटागोह, गोयरा, गोयली, खरगोश, चुहे, गिलहरी, नेवले सहित कई वन्य जीव-जंतु भी समाप्त हुए होंगे। इसलिए जंगल की आग को निदंनीय माना गया है। जंगल की आग से उस क्षेत्र के तापमान में 5 डिग्री का इजाफा हो जाता है।
डॉ.परमेश्वर सिंह चौहान, वानिकी विशेषज्ञ

ऐसे पहुंची दमकल-
-9.19 पर पुलिस कंट्रोल से आग की सूचना मिली।
-9.20 पर प्रथम दमकल रवाना की गई।
-10.10 पर प्रथम दमकल ने पहुंचकर आग बुझाना शुरू किया। दो फायरमैनों के साथ।
- दमकल के नहीं पहुंचने पर मौक पर मौजूद पत्रिका संवाददाता ने जिला कलक्टर डॉ.जितेन्द्र सोनी को फोन लगाया। उसके बाद दो गाडिय़ां और रवाना की गई।
- 9.51 पर कंट्रोल से फिर फोन आया।दूसरी गाड़ी एक फायरमैन के ही 10 बजे रवाना की।
-10.10 एक दमकल झालरापाटन नगर पालिका की बुलाई गई।
-दूसरी गाड़ी भेजने में इस लिए देरी हुई की मौके पर कोई भी फायरमैन मौजूद नहीं थे।

जंगल जले, आदमी मरे इन्हें तो अपना काम प्यारा
फायर शाखा के 14 लोगों को नगर परिषद में मलाईदार शाखाओं में लगा रखा है। जिले में तापमान 48 डिग्री पर पहुंच रहा है। प्रतिदिन आग लगने की घटनाएं हो रही है। लेकिन नगर परिषद के उच्चाधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में भले ही जंगल जले, वन्य जीव मरे या किसी के खेत-घर में आग लगे इन्हें तो अपने काम से मतलब। ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम 48 डिग्री तापमान हो रहा तो 24 घंटे पर्याप्त फायरमैन मौजूद होना चाहिए।

यह बोले जिम्मेदार
100 मीटर से अधिक की लंबी पट्टी में आग लगी थी। करीब 20 बीघा से अधिक वन क्षेत्र जल गया है। 1500 सौ से अधिक पौधे नष्ट हुए होंगे। वन अनुसंधान संस्थान देहरादून से आने वाले फोन डॉ. सी.आर. मीणा के पास जा रहे हैं। इससे संदेश नहीं मिल पाया। बाद में जंगल में रास्ता बनाकर 12.30 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया था।
रामचन्दओगरा, मंडल वन अधिकरी, झालावाड़

Published on:
28 May 2018 06:15 pm