झालावाड़

मिलावट पर अंकुश नहीं होली के त्योहार पर, जिम्मेदार विभाग सुस्त

त्योहार पर मिलावटखोर सक्रिय

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There is no control on adulteration during Holi festival, responsible departments are lazy
सुनेल मिठाई की दुकान पर बिक्री के लिए शेकेस में सजी मिठाइयां।

सुनेल. मुनाफे के फेर में मिलावटखोर जनता को जहर बेच रहे है और स्वास्थ्य का पहरेदार प्रशासन सो रहा है। तेल, रिफांइड, मसाले, आटा, मिठाई, मावा, पनीर शायद ही ऐसी कोई चीज हो, जिसमें यहां मिलावट के मामले समय-समय पर सामने नही आती हों। कार्रवाई के नाम पर प्रशासनिक टीमों ने सिवा कागज भरने के कुछ नहीं किया। नतीजा, मिलावटखोरों के हौंसले बढ़ते रहे और उसके दुष्परिणाम सामने आ रहे है। मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों पर ही विभाग द्वारा की जाती है। हैरत करने वाली बात है कि खानापूर्ति के लिए सिर्फ जुर्माना करके ही छोड़ दिया गया। कस्बे व ग्रामीण इलाकों में मिलावटी तेल, मिलावटी ड्रायफ्रूट्स, मिलावटी मसाला, मिलावटी ऑयल, दालचीनी सहित कई प्रकार की सामग्री पर कार्रवाई व जांच को लेकर खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग बेपरवाही बरत रहा है। होली का त्योहार सिर पर होने के बाद भी मावा, मिठाइयों, खाद्य सामग्री आदि की जांच अभियान की कार्रवाई में आंख मिचौली की जा रही है।
स्वास्थ्य से खिलवाड़
स्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी शांत बने हुए है। होली के त्योहार पर खाने पीने के लिए मिलावट खोर सक्रिय हो गए है। मिलावटी मावा बिक्री को तैयार हो रहा है। कस्बे समेत आसपास के इलाकों मिलावटी मावा बन रहा है। लेकिन अभी तक विभाग अधिकारियों ने ध्यान नही दिया है। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों को शहर के लोगों की सेहत की चिंता ही नहीं है। शिकायत के बाद भी विभाग के अधिकारी सैंपल लेने नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले लोगों पर विभाग कार्रवाई से दूरी बना रहा है।
मालूम है फिर भी कार्रवाई नहीं
कस्बे सहित क्षेत्र में कुछ स्थानों पर खराब मावा बन रहा है। लेकिन विभाग इसको लेकर खास तबज्जों नहीं देता। ये मावा सस्ते में दुकानों पर खपाया जाता है लेकिन विभाग को यह नजर नहीं आ रहा। जिससे विभागीय कार्यशैली भी संदेह के घेरे में बनी हुई है। खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वालों पर कई तरह सजा के प्रावधान है। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इन पर लगातार पर्दा डाला जाता है।
जुर्माने का प्रावधान
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऐक्ट के तहत मिलावटखोरों पर सजा का प्रावधान है। महकमा सैपल फेल होने पर दुकानदार को पहले नोटिस देता है, अगर किसी खाद्य पदार्थ पर कंपनी का लेबल, पता, पोषक तत्वों की जानकारी आदि गलत प्रकाशित की जाती है तो एक्ट के तहत जुर्माना किया जा सकता है। अगर खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता कम पाई जाती है तो सजा व जुमाने का प्रावधान है। अगर खाद्य पदार्थ में कोई केमिकल मिला हो और उसके इस्तेमाल से किसी की मौत हो जाती है तो दोषी पर जुर्माने के साथ जेल का प्रावधान है।

राज्य सरकार की 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत शुद्व आहार पर मिलावट का वार अभियान और होली पर्व के नजदीक को देखते हुुए विशेष अभियान के तहत जिले में अब तक विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 20 सैंपल ले चुके है। वही विभिन्न क्षेत्र से लगभग 50 किलो मावा, जलेबी सहित अन्य मिठाईयां फिकवाई गई है। अभी अभियान जारी है, आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
अरूण सक्सैना,खाद्य सुरक्षा अधिकारी झालावाड़

Published on:
24 Mar 2024 12:13 pm