झालावाड़

जब बैल भी बने परिवार के सदस्य, तो वि​धि-विधान से निभाई परंपराएं

सरकनिया में दो बैलों की मौत पर किसान ने किया अंतिम संस्कार भवानीमंडी। उपखंड क्षेत्र के सरकनिया गांव में एक किसान परिवार ने यह साबित कर दिया कि परंपराएं केवल निभाई नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं। यहां दो बैलों की मौत के बाद किसान परिवार ने उन्हें महज पशु नहीं बल्कि परिवार का सदस्य […]

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सरकनिया में दो बैलों की मौत पर किसान ने किया अंतिम संस्कार

भवानीमंडी। उपखंड क्षेत्र के सरकनिया गांव में एक किसान परिवार ने यह साबित कर दिया कि परंपराएं केवल निभाई नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं। यहां दो बैलों की मौत के बाद किसान परिवार ने उन्हें महज पशु नहीं बल्कि परिवार का सदस्य मानते हुए पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर अनूठी मिसाल पेश की।

किसान सौदान सिंह, कुशाल सिंह, उमराव सिंह, धीरप सिंह, मेघ सिंह, मनोहर सिंह और बहादुर सिंह ने बताया कि उनके परिवार के पास पिछले करीब 20 वर्षों से दो बैल थे। इनमें से बैल रूपालिया की कुछ दिन पहले मौत हो गई थी, जबकि दूसरे बैल सागु का निधन 9 जनवरी को हुआ। दोनों बैलों के निधन से परिवार गहरे शोक में डूब गया।

भजन संध्या का आयोजन

बैलों की याद में किसान परिवार ने शनिवार रात भजन संध्या का आयोजन किया। वहीं रविवार को करीब 2 हजार लोगों के लिए भंडारे का आयोजन हुआ। इससे पहले किसान परिवार गंगाजी जाकर पारंपरिक रीति-रिवाज भी निभाकर लौटा। इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

किसान की रीढ़ होते हैं बैल

ग्रामीणों ने कहा कि बैल किसान के जीवन और खेती की रीढ़ होते हैं। वर्षों तक खेतों में पसीना बहाने वाले ये पशु परिवार का हिस्सा बन जाते हैं, ऐसे में उनका सम्मान और सेवा करना हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है।

Published on:
01 Feb 2026 08:00 pm
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