
झांसी। जीवन में ज्ञान धर्म प्राप्त करने की बेला बड़ी मुश्किल से मिलती है। कभी भावना नहीं होती, तो कभी समागम नहीं मिलता किंतु अब की बार दोनों अवसर एक साथ हैं। परिवार में प्रेम बनाये रखना है तो सामूहिक भोजन करो और समाज में प्रेम बनाये रखना है तो सामूहिक भजन करो। यह सद्वचन अतिशय क्षेत्र करगुवां में चल रहे सिद्धि चक्र महामण्डल विधान एवं विश्व शांति यज्ञ के चौथे दिन आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे गए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न पूर्णमति माता ने कहा कि भजन और भोजन का बड़ा गहरा संबंध है। यह सब पुरुषार्थ से ही संभव होता है। कलुषित भाव आने पर सीधा नरक के गर्त में जाना पड़ता है।
भोगना पड़ता है ईर्ष्या का फल
आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि ईर्ष्या अपनों से क्या पराये अर्थात दूसरों से भी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए क्योंकि जिससे आप ईर्ष्या कर रहे हो उसका कुछ नहीं बिगड़ता बल्कि ईर्ष्या करने वाले को बुरा फल भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि निषेध में जिज्ञासा पैदा होती है, किंतु जिस पर गुरु कृपा हो जाये उस पर तो प्रभु की कृपा अवश्य ही होगी और जब प्रभु कृपा होगी तो फिर जाकौ राखें साईयां मार सके न कोय, बाल न बांका न कर सके जो जग बैरी होय। परमात्मा की कृपा से हर विपत्ति तुम्हारे लिये सम्पत्ति बन जायेगी। विष भी अमृत बन जाता है। विधान के चौथे दिवस चौसठ सिद्धियों की महापूजा विधि विधान से कराई गई। इसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
ये लोग रहे उपस्थित
इस मौके पर डा. विनय कुमार जैन, रविन्द्र जैन नारियल वाले, श्रीमती रजनी गौतम जैन, श्रीमती सुधा-राजेंद्र बडज़ात्या, किरन जैन लश्कर, शकुन्तला जैन इंदौर आदि मौजूद रहे। इसके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, प्रवीण जैन, कमल जैन शिवाजी, सजल, शांति कुमार जैन ने परिजनों सहित पूजा विधान में हिस्सा लिया।