एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी, जिसके सपने विदेश में कानून की पढ़ाई करने के हैं। पैसे की कमी, सामाजिक रीति-रिवाजों की बंदिशें, और अनेक चुनौतियां। लेकिन हार नहीं मानी गजल खान ने। अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने न सिर्फ अपना सपना पूरा किया, बल्कि आज वे अमेरिका में रहकर अंग्रेजों को कानूनी सहायता दे रही हैं।
Jhansi Daughter Ghazal Khan: जहां बेटियों को बोझ समझा जाता है, वहां गजल खान ने अपनी मेहनत और लगन से एक अनोखी मिसाल पेश की है। झांसी की रहने वाली गजल ने न सिर्फ अमेरिका में कानून की पढ़ाई की (Study of Law in America है, बल्कि वहां रहकर अंग्रेजों को भी कानूनी सहायता दे रही हैं। गजल की यह सफलता उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए जूझ रही हैं।
मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली गजल के लिए विदेश में जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं था। उनके पिता राष्ट्रीय स्तर के एथलीट रहे हैं, लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह गजल को अमेरिका भेज सकें। लेकिन हार नहीं मानने वाली गजल ने पुणे की सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी।
गजल के अंदर अमेरिका जाने का सपना हमेशा बना रहा। 2022 में उनकी मेहनत रंग लाई और अमेरिका की पैन स्टेट यूनिवर्सिटी ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें एलएलएम की डिग्री के लिए 100% स्कॉलरशिप दी। आज गजल न्यूयॉर्क के एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म में लीगल एडवाइजर के साथ-साथ सिएटल शहर की लॉ फर्म में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
गजल की सफलता हमें यह सिखाती है कि लिंग, पैसा या सामाजिक रीति-रिवाज सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बन सकते। गजल उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा हैं जो समाज की रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं।