काउंसिलिंग हो रही परिवार बचाने में कारगर
झांसी। परिवार परामर्श केंद्र के दौरान यह बात सामने आई कि एक परिवार बसाने के लिए कई रिश्तों की भूमिका होती है। लेकिन उसी परिवार को बिखरने के लिए शक की एक चिंगारी या शराब की लत ही काफी है। यह कहना है उन दम्पतियों का जो परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसिलिग के बाद दुबारा अपना गृहस्थ जीवन राजी खुशी से शुरु कर रहे हैं।
सात सौ मामले आए
महिला थाने में चलने वाले परिवार परामर्श केन्द्र में अब तक सात सौ मामले आए। इनमें चार सौ में समझौता हो गया जबकि ढाई सौ मामले खारिज हो गए हैं। महिला परामर्श केन्द्र में आने वाले अधिकांश मामलों की जांच पड़ताल की गई तो झगड़े की वजह चौंकाने वाली निकली। वजह है मोबाइल, टीवी सीरियल और एक दूसरी वजह है शराब। मोबाइल और टीवी सीरियल ने कई घर को तोड़ दिया तो कई घर को शराब ने बर्बाद कर दिया। महिला हो या पुरुष दोनों ही परिवार परामर्श केन्द्र में जब अपनी परेशानी बताते हैं, तो मामले की काउंसिलिंग करने वाले भी चिंतित होने लगते हैं कि यह भी विवाद की वजह हो सकती है, लेकिन आजकल मोबाइल व टीवी सीरियल ने पति पत्नी के बीच रिश्तों की नींव को हिला रखा है।
दस मामलों में से हुआ चार में समझौता
इस दौरान बताया गया कि परिवार परामर्श केन्द्र में दस मामले आए हैं, इसमें चार में समझौता हो गया। जबकि छह मामलों में पति व पत्नी एक साथ रहने को तैयार ही नहीं। वह किसी भी कीमत पर एक दूसरे को अपनाना ही नहीं चाहते ऐसे परिवार को कानूनी सलाह दी गई है। इस अवसर पर नीति शास्त्री, महिला उपनिरीक्षक पूनम वर्मा, महिला कांस्टेबल किरन दुबे, महिमा कुशवाहा, पूजा, हेड कांस्टेबल उमा देवी आदि लोग उपस्थित रहे।
इनका कहना है
महिला थाने की निरीक्षक पूनम शर्मा का कहना है कि जो भी शिकायत आती है उनका मनोवैज्ञानिक तरीके से समाधान करने की कोशिश करते हैं। अधिकांश मामले ऐसे होते हैं इसमें पति शराब पीकर पत्नी से मारपीट करता। जो विवाद की वजह बनती है। तो कुछ ऐसे भी मामले आते है इसमें झगड़े का कारण सब्जी में नमक कम है तो कोई इस कारण विवाद करता है।