दोनों ही छोटे बच्चे थे जो भोजन पानी की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं थे। अपनी मां से कैसे बिछड़े इसकी जांच भी की जा रही है। लगातार प्रजनन से बढ़ रहा पैंथर का कुनबा जंगल के लिए अच्छी खबर थी। लेकिन एक सप्ताह में ही दो पैंथर वह भी मादा पैंथर की मौत होना वन विभाग के लिए चिंता बनी हुई है।
मनसा माता क्षेत्र के पहाड़ों में सात दिन में दो मादा पैंथर की मौत हो गई। एक की उम्र करीब दो साल की थी जबकि दूसरी की उम्र करीब डेढ साल थी। खास बात यह है कि दोनों मादा पैंथर की मौत की जगह की दूरी मात्र 700 से 800 मीटर की बताई जा रही है। 17 नवम्बर 2024 को एक मादा पैंथर की मौत होने के बाद 23 नवम्बर 2024 को दूसरे मादा पैंथर की मौत होने पर वन विभाग की चिंता बढ़ गई। अभी 17 नवंबर को मादा पैंथर की मौत के कारणों तक वन विभाग की टीम पहुंच नहीं पाई। दूसरे मादा पैंथर की मौत के बाद वन विभाग अलर्ट मोड में दिखा। क्षेत्रीय वन अधिकारी विजय कुमार फगेड़िया ने बताया कि उपवन संरक्षक झुंझुनूं बनवारी लाल नेहरा के नेतृत्व में उदयपुरवाटी, खेतड़ी, नवलगढ़ ,झुंझुनूं सहित अन्य वन विभाग के रेंजों की टीम ने पहाड़ों में अलग-अलग जगह पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। दोनों के मौत के लक्षण भी एक ही बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि वन विभाग की सर्च टीम दोनों की उम्र का अंतर जरूर बता रही है। चिकित्सकों की टीम के नहीं आने के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका। असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन माना जा रहा है कि भूख भी कारण हो सकता है।
वन विभाग व पशु चिकित्सा विभाग की टीम सात दिन में हुई दो मादा पैंथरों की मौत का कारण मुख्य रूप से भूख मान रही है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही छोटे बच्चे थे जो भोजन पानी की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं थे। अपनी मां से कैसे बिछड़े इसकी जांच भी की जा रही है। मनसा माता में विकसित की जा रही पैंथर सफारी में बाहर से आए रेस्क्यू कर पैंथरों में मात्र एक या दो मादा पैंथर लाए गए थे। लगातार प्रजनन से बढ़ रहा पैंथर का कुनबा जंगल के लिए अच्छी खबर थी। लेकिन एक सप्ताह में ही दो पैंथर वह भी मादा पैंथर की मौत होना वन विभाग के लिए चिंता बनी हुई है। क्योंकि मादा पैंथर से पैंथर का कुनबा बढ़ेगा। मादा पैंथर ही नहीं रहेगी तो कौन बढ़ाएगा कुनबा।