श्री गंगानगर

#KabMilegiJaharSeMukti लो कर लो बात…यहां शराब और केरोसिन पीती हैं सब्जियां

चिड़ावा के काश्तकार कीटनाशक में क्लोरोपाइरीफोस एवं मानोक्रोटोफोस का इस्तेमाल किया जाता है। कीटनाशक के अलावा कुछ काश्तकार अब फसलों में हथकड़ शराब एवं केरोसिन तक का सब्जियों में अब इस्तेमाल करने लग गए हैं।
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Updated: 13 May 2017, 12:52 PM IST
vegetables in jhunjhunu
alcohol use in vegetables

कम समय में ज्यादा उत्पादन लेने के लिए फल एवं सब्जी के काश्तकार जहरीली खाद एवं कीटनाशक का अत्यधिक इस्तेमाल करने लगे हैं। इसके चलते बाजारों में कीटनाशी की मांग में पिछले दो-तीन सालों में दोगुनी-तीन गुनी के करीब पहुंच गई हैं। जानकारों की मानें तो अधिक पैदावर व मुनाफे के चक्कर में यूरिया, डीएपी, एसएसपी, डीएसपी का प्रयोग अत्यधिक होने लगा है।

वहीं कीटनाशक में क्लोरोपाइरीफोस एवं मानोक्रोटोफोस का इस्तेमाल किया जाता है। चिड़ावा के काश्तकार कीटनाशक के अलावा कुछ काश्तकार अब फसलों में हथकड़ शराब एवं केरोसिन तक का सब्जियों में अब इस्तेमाल करने लग गए हैं।

सब्जी की खेती करने वाले काश्तकार का कहना है कि सर्वाधिक कीटनाशक का इस्तेमाल मिर्ची में किया जाता है। इसके अलावा अन्य सब्जियों में भी इस्तेमाल होता है। जहरीली खाद का इस्तेमाल करने का एक और कारण बेमौसम की फसल जल्दी से जल्दी बाजार तक पहुंचाने का भी है।

बढ़ी है रासायनिक पदार्थों की बिक्री

फल व सब्जी में इस्तेमाल होने वाले रासाइनिक पदार्थो की ब्रिकी बढ़ी है। कीटनाशक की अलग-अलग वैरायटी भी उपलब्ध है। जहरीली खाद की भी अलग-अलग वैरायटी की बाजार में भरमार है।

फल एवं सब्जी की खेती में अत्याधिक जहरीली खाद एवं कीटनाशक का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक है। काश्तकारो को भी जैविक खेती की तरफ रूख करना चाहिए। पिछले 20 साल से जैविक खेती कर रहा हूं और साथी काश्तकारो को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहा हूं।

बजरंग सिंह बराला, किसान, पिचानवां


जैविक खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़े इसलिए संस्था प्रयासरत है। समय समय पर चिड़ावा उपखंड के गांवों में जैविक खेती को अपनाने और जहरीली खाद एवं कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गणेश चेतीवाल, समन्वयक, पसारी फाउण्डेशन

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