Havelis of Shekhawati: झुंझुनूं में बड़े-बड़े चौक, बड़ी-बड़ी छत, दिल जैसे जाली व झरोखेदार शेखावाटी की हवेलियों पर हथौड़ा नहीं चलेगा। शेखावाटी में पहले चरण में 648 हवेलियों का संरक्षण किया जाएगा।
Havelis of Shekhawati: झुंझुनूं में बड़े-बड़े चौक, बड़ी-बड़ी छत, दिल जैसे जाली व झरोखेदार शेखावाटी की हवेलियों पर हथौड़ा नहीं चलेगा। शेखावाटी में पहले चरण में 648 हवेलियों का संरक्षण किया जाएगा। इनकी पहचान कर ली गई है। खास बात यह है कि शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण के लिए बायलॉज बदलने की तैयारी भी की जा रही है। ताकि हवेलियों का पुरा वैभव बना रहे। बता दें झुंझुनूं में 267, सीकर में 268 और चूरू में 113 हवेलियां चिह्नित की गई हैं।
दरअसल, हवेलियों की पहचान करने के बाद अब हवेलियों के वास्तविक स्वामित्व के समस्त तथ्य जुटाए जाएंगे। यह पता लगाया जाएगा कि जिन हवेलियों की पहचान की गई है, उनके असली मालिक कौन हैं। इसके लिए सीकर, झूंझनू और चूरू जिलों के कलक्टर एक फाइनल दस्तावेज तैयार करेंगे। इसमें हवेलियों के वर्तमान स्थिति के फोटो भी संलग्न किए जाएंगे। इसके साथ ही इन हवेलियों पर किसी भी तरह का कोई अतिक्रमण न हो इसके लिए तीनों जिला कलक्टर सक्रिय रहेंगे।
सीकर जिले गौरीलाल बियाणी की हवेली, रामगढ़ में ताराचन्द रूइया की हवेली, फतेहपुर में नन्दलाल देवड़ा, कन्हैयालाल गोयनका की हवेली श्रीमाधोपुर में पंसारी की हवेली, लक्ष्मणगढ़ में केडिया एवं राठी की हवेली व चार चौक की हवेली प्रसिद्ध है। चूरू में मालजी का कमरा, रामनिवास गोयनका की हवेली, मंत्रियों की हवेली, सुराणा की हवेली व शेखावाटी के हवामहल देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं। झुंझुनूं जिले में मंडावा, झुंझुनूं शहर, महनसर, नवलगढ़, डूंडलोद, मुकुंदगढ़, सूरजगढ़, मलसीसर, अलसीसर सहित अनेक जगह हवेलियां हैं।
काजड़ा गांव की हवेलियां भी काफी प्रसिद्ध हैं। खास बात यह है कि यहां की अधिकतर हवेलिया बेहतर हालात में है। हवेलियां जर्जर नहीं है। इनका समय-समय पर रंग रोगन होता रहता है।
शेखावाटी में जो विदेशी पर्यटक आते हैं उनकी पहली पसंद हेरिटेज हवेलियां देखना ही होता है। खास बात यह है कि अधिकतर पर्यटक नई जमाने की होटलों की बजाय हेरिटेज होटलों में ही रुकना पसंद करते हैं।
वहीं, पर्यटन विभाग के शासन सचिव रवि जैन का कहना है कि शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। तीनों जिलों में 648 हवेलियों की पहचान कर ली गई है। हवेलियों के संरक्षण से पर्यटन को भी फायदा होगा। विदेशी पर्यटक पुरानी हवेलियों को देखने शेखावाटी में ज्यादा आएंगे।