सेना से रिटायर्ड होने के बाद उसने सौ पेड़ सफेद चंदन व सौ पेड़ लाल चंदन के लगाए। अब यह पेड़ चार से पांच साल के हो गए हैं। पेडों में पानी देने के लिए सौलर से चलने वाला पम्पसेट लगा रखा है।उसने बताया कि चंदन की लकड़ी का भाव करीब पांच से छह हजार रुपए किलो है। चंदन की भी अनेक किस्मे हैं। इसका तेल काफी महंगा बिकता है।
राजेश शर्मा.
झुंझुनूं. यह फौजी अलग है। पेड़ पौधों व प्रकृति के प्रति इसका अलग जुनून है। चंदन के जो पेड़ कर्नाटक व तमिलनाडु में उगते हैं वो इसने अपने खेत में उगा दिए हैं। पेड़ भी नाम मात्र के नहीं। पूरे दो सौ। सौ पेड़ सफेद चंदन के हैं और सौ पेड़ लाल चंदन के। यह पेड़ अब करीब चार से पांच साल के हो गए हैं। नौ से 12 साल के होने पर एक पेड़ की कीमत एक से डेढ़ लाख लाख रुपए हो जाएगी।
झुंझुनूं से करीब 10-12 किलोमीटर दूर बुड़ाना गांव निवासी जमील पठान ने बताया कि जब वह सेना में था तब सोचता था कि रिटायर्ड होने के बाद वह दूसरी नौकरी नहीं करेगा। अपने गांव में ही कुछ अलग हटकर कार्य करेगा। ताकि लोग पर्यावरण से जुड़ें और नौकरी की बजाय स्वरोजगार पर ध्यान दें। सेना से रिटायर्ड होने के बाद उसने सौ पेड़ सफेद चंदन व सौ पेड़ लाल चंदन के लगाए। अब यह पेड़ चार से पांच साल के हो गए हैं। पेडों में पानी देने के लिए सौलर से चलने वाला पम्पसेट लगा रखा है।
उसने बताया कि चंदन की लकड़ी का भाव करीब पांच से छह हजार रुपए किलो है। चंदन की भी अनेक किस्मे हैं। इसका तेल काफी महंगा बिकता है। इसके अलाव अनेक प्रकार की दवा, हवन, पूजा सहित अनेक जगह इसका उपयोग होता है। बड़ा होने पर एक पेड़ एक से डेढ लाख रुपए में बिकेगा। ऐसे में दो सौ पेड़ करीब दो करोड़ रुपए के बिकेंगे। उसका कहना है कि अगले दो साल में उसका लक्ष्य चंदन के एक हजार पेड़ लगाने का है। लोग अब इसे चंदन वाले फौजी के नाम से जानने लगे हैं।
#chandan wala fouji
हर माह एक लाख से ज्यादा की बचत
दसवीं तक पढ़े पठान ने अपने 60 बीघा के खेत में चार हजार पेड़ किन्नू, चार हजार पेड़ मौसमी, रेड माल्टा व नींबू के उगा रखे हैं। इससे उसे हर साल करीब 15 लाख रुपए की आय हो जाती है। इसके अलावा उसने बादाम, चेरी, आंवला, अमरूद, आम, जामून सहित सैकड़ों फलदार व सैकड़ों प्रकार के फूलदार पौधे लगा रखे हैं।
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मिल चुके पुरस्कार
पठान को कृषि विभाग का आत्मायोजना के तहत 25 हजार रुपए का पुरस्कार मिल चुका। इसके अलावा वन विभाग भी वृक्ष वर्धक पुरस्कार से सम्मानित कर चुका।
इनका कहना है
बुड़ाना के जमीन पठान ने अपने खेत में सैकड़ों प्रकार के फलदार व फूलदार पौधे लगा रखे हैं। पिछले दिनों यहां पर्यटकों का दल आया तो चंदन के पेड़ देखकर आश्चर्यचकित रह गया।
-देवेन्द्र चौधरी,
सहायक निदेशक, पर्यटन
बुडाना में मैं जाकर आया था। वहां चंदन के पेड़ लगे हुए हैं। कृषि विभाग भी उसे पुरस्कृत कर चुका। उदयपुर क्षेत्र में भी चंदन के पेड़ लग रहे हैं।
-डॉ दयानंद, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र आबूसर